चलती गाड़ियों को बीच सड़क रोकने से हादसे का खतरा, वाहन चालकों ने अधिकारियों से जांच की मांग की
बाबूगिरी हिंदी न्यूज़
चंडीगढ़,25 जून। शहर के मध्य मार्ग स्थित रेलवे स्टेशन लाइट प्वाइंट पर ट्रैफिक पुलिस द्वारा बाहरी नंबर वाली गाड़ियों की चेकिंग को लेकर वाहन चालकों में नाराजगी देखने को मिल रही है। कई वाहन चालकों का आरोप है कि ट्रैफिक पुलिस कर्मियों द्वारा वॉयलेशन के नाम पर चलती गाड़ियों को बीच रास्ते में हाथ देकर अचानक रोका जा रहा है, जिससे सड़क सुरक्षा को लेकर खतरा पैदा हो रहा है।
वाहन चालकों ने इस संबंध में कुछ फोटो और वीडियो भी मिडिया व अधिकारियों को भेजकर मामले की जांच करवाने और नाजायज तरीके से की जा रही चेकिंग पर रोक लगाने की मांग की है।
हिमाचल प्रदेश निवासी एक कार चालक ने बताया कि रेलवे स्टेशन लाइट प्वाइंट पर पिछले एक सप्ताह से अधिक समय से यह स्थिति बनी हुई है। उनके अनुसार, ट्रैफिक पुलिस कर्मी पूरी लाइन में चल रही गाड़ियों में से बाहरी नंबर देखकर अचानक बीच सड़क पर वाहन रुकवा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि लाइट प्वाइंट जैसे व्यस्त स्थान पर अचानक गाड़ी रोकना खतरनाक हो सकता है। पीछे से आ रही गाड़ी चालक को अचानक ब्रेक लगाने का मौका नहीं मिलता, जिससे आपस में टक्कर होने का खतरा बना रहता है। कई बार ऐसे मामलों में वाहन चालकों के बीच विवाद और मारपीट तक की स्थिति पैदा हो सकती है।
वाहन चालकों का कहना है कि यदि किसी वाहन चालक ने ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन किया है तो पुलिस को नियमानुसार चालान करने का पूरा अधिकार है, लेकिन केवल बाहरी नंबर देखकर चलते वाहन को बीच सड़क पर रोकना उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि इस पूरी कार्रवाई की हकीकत लाइट प्वाइंट पर लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच से सामने आ सकती है। वाहन चालकों ने मांग की है कि वरिष्ठ अधिकारी मौके की जांच करवाएं और ट्रैफिक व्यवस्था को सुरक्षित तरीके से लागू करवाएं।
गौरतलब है कि इससे पहले भी चंडीगढ़ ट्रैफिक पुलिस के कुछ कर्मचारियों पर सवाल उठ चुके हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार पिछले महीने दो ट्रैफिक पुलिस कर्मियों के पैसे लेने का वीडियो वायरल हुआ था, जिसके बाद उच्च अधिकारियों ने कार्रवाई करते हुए संबंधित कर्मचारियों को निलंबित कर लाइन हाजिर किया था।
वाहन चालकों का कहना है कि चंडीगढ़ पुलिस की देशभर में बेहतर छवि है, लेकिन कुछ कर्मचारियों की गलत कार्यप्रणाली के कारण विभाग की प्रतिष्ठा प्रभावित होती है। उन्होंने पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से अपील की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर उचित कार्रवाई की जाए, ताकि आम जनता को परेशानी न हो और पुलिस की छवि बनी रहे। उधर ट्रैफिक पुलिस कर्मी का कहना है कि आलाधिकारियों ने रोजाना 15 चालान करने का टारगेट दिया हुआ है, टारगेट पूरा करने के लिए वाहन रोक कर चालान करने पड़ते है। चालान जे टारगेट दिए है या नही यह तो आलाधिकारियों ही बता सकते है। या चालान के नाम पर वैसे ही बाहरी वाहन चालकों को परेशान किया जा रहा है।












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