June 17, 2026 1:33 pm

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चंडीगढ़ में हरियाणा की तर्ज पर कौशल रोजगार निगम बनाने की मांग तेज

आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के शोषण का आरोप, निगम से करोड़ों की बचत का दावा
चंडीगढ़, 16 जनवरी। चंडीगढ़ में हरियाणा सरकार की कौशल रोजगार निगम (HKRN) की तर्ज पर स्थायी और सुरक्षित रोजगार नीति लागू करने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के संगठनों ने आरोप लगाया है कि मौजूदा ठेकेदारी व्यवस्था में मैनपावर ठेकेदार कर्मचारियों का शोषण कर रहे हैं, जबकि प्रशासन को भी हर साल करोड़ों रुपये का अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठाना पड़ रहा है।
इस संबंध में चंडीगढ़ के प्रशासक को दोबारा ज्ञापन भेजकर मांग की गई है कि हरियाणा भाजपा सरकार की तरह चंडीगढ़ में भी कौशल रोजगार निगम का गठन किया जाए, जिससे आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को नौकरी की सुरक्षा मिल सके।

ठेकेदारी प्रथा से शोषण का आरोप
ज्ञापन में कहा गया है कि भारत सरकार की GeM (Government e-Marketplace) प्रणाली के तहत बार-बार ठेकेदार बदलने से कर्मचारियों की नौकरी असुरक्षित हो जाती है। कई विभागों में
दो-दो महीने तक वेतन नहीं मिलता,
ईपीएफ की राशि जमा नहीं की जाती,
महिला कर्मचारियों को मातृत्व अवकाश का भुगतान नहीं किया जाता।
इतना ही नहीं, कई मामलों में नौकरी बनाए रखने के नाम पर कर्मचारियों से लाखों रुपये की अवैध मांग किए जाने के आरोप भी लगाए गए हैं।

प्रशासन को होगा आर्थिक लाभ
कर्मचारी संगठनों का दावा है कि यदि चंडीगढ़ में कौशल रोजगार निगम की नीति अपनाई जाती है तो GeM के तहत सेवा प्रदाताओं को दिए जाने वाले लगभग 3.85 प्रतिशत कमीशन की बचत होगी। इससे चंडीगढ़ प्रशासन के राजस्व में सालाना करोड़ों रुपये की वृद्धि हो सकती है और ठेकेदारों की बिचौलिया व्यवस्था समाप्त होगी।

प्रशासनिक स्तर पर सहानुभूति, आदेश लंबित
ज्ञापन में बताया गया कि इससे पहले 20 अगस्त 2025 को यूटी सचिवालय में जनता दरबार के दौरान इस मुद्दे पर सुनवाई हुई थी, जहां प्रशासक के निर्देश पर प्रधान सचिव ने समस्या को गंभीर माना था।
इसी क्रम में 14 जनवरी 2026 को जीएमसीएच सेक्टर-32 के निदेशक-प्रिंसिपल ने भी कर्मचारियों की बात सुनी और एचकेआरएन नीति से जुड़े दस्तावेज मंगवाए। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यदि प्रशासक स्तर से आदेश जारी होते हैं, तो जीएमसीएच प्रशासन इस नीति को अपनाने के लिए तैयार है।

20 साल से सेवा दे रहे कर्मचारी असुरक्षित
कर्मचारी नेताओं का कहना है कि 10 से 20 वर्षों से सेवाएं दे रहे अनुभवी आउटसोर्सिंग कर्मचारी हर बार ठेकेदार बदलने पर मानसिक उत्पीड़न और नौकरी जाने के डर में जीने को मजबूर हैं। यह स्थिति संविधान के अनुच्छेद 14 से 18 में निहित समानता और अधिकारों के खिलाफ है।

प्रशासक से सीधी अपील
ज्ञापन के माध्यम से प्रशासक से अपील की गई है कि वे अपने स्तर पर हस्तक्षेप कर चंडीगढ़ में कौशल रोजगार निगम की नौकरी सुरक्षा नीति को तुरंत लागू करवाएं, ताकि हजारों कर्मचारियों को स्थायी रोजगार सुरक्षा मिल सके और प्रशासन को भी पारदर्शी व भ्रष्टाचार-मुक्त व्यवस्था का लाभ हो।

 

 

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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