September 24, 2026 8:55 am

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मनरेगा ग्रामीण भारत के करोड़ों परिवारों के लिए जीवनरेखा है: कुमारी सैलजा 

-केंद्र सरकार मनरेगा के स्वरूप में बदलाव करके ग्रामीण मजदूरों के काम मांगने के कानूनी अधिकार व ग्राम पंचायतों की भूमिका को कमजोर कर रही है

चंडीगढ़ / फतेहाबाद, 24 जनवरी।  जिला फतेहाबाद के गाँव बनगांव में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के आह्वान पर आयोजित पंचायत-स्तरीय कार्यक्रम में सिरसा की सांसद, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री कुमारी सैलजा ने भाग लिया। यह कार्यक्रम महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को कमजोर करने के विरुद्ध तथा ग्रामीण गरीबों के काम के संवैधानिक अधिकार की रक्षा के उद्देश्य से आयोजित किया गया। कार्यक्रम में ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों, मनरेगा मजदूरों, महिलाओं, युवाओं और ग्रामीणों की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही।

कुमारी सैलजा ने अपने संबोधन में कहा कि मनरेगा केवल एक सरकारी योजना नहीं है, बल्कि ग्रामीण भारत के करोड़ों परिवारों के लिए जीवनरेखा है, जिसने पिछले दो दशकों में गरीब, मजदूर, किसान और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान की है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा के स्वरूप में किए जा रहे बदलाव ग्रामीण मजदूरों के काम मांगने के कानूनी अधिकार, न्यूनतम मजदूरी की गारंटी और ग्राम पंचायतों की भूमिका को कमजोर कर रहे हैं। डिजिटल सत्यापन की जटिलताएँ, भुगतान प्रणाली में देरी, बजट में अपेक्षित वृद्धि का अभाव और प्रशासनिक नियंत्रण का केंद्रीकरण मनरेगा की मूल भावना के विपरीत है।

कुमारी सैलजा ने कहा कि कोरोना महामारी जैसे कठिन समय में मनरेगा ने करोड़ों परिवारों को आर्थिक सहारा दिया था, लेकिन आज उसी योजना को व्यवस्थित रूप से कमजोर किया जा रहा है। इससे गरीब मजदूरों का काम और सम्मान दोनों प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पहले ग्राम पंचायतों को अपने गाँव के विकास कार्यों की योजना बनाने और मजदूरों को काम देने का अधिकार था, परंतु अब निर्णय ऊपर से थोपे जा रहे हैं, जिससे पंचायतों की स्वायत्तता समाप्त हो रही है और स्थानीय जरूरतों की अनदेखी हो रही है। कांग्रेस पार्टी की ओर से उन्होंने स्पष्ट किया कि काम की कानूनी गारंटी को पूर्ण रूप से बहाल किया जाना चाहिए, मनरेगा में किए गए प्रतिकूल बदलावों को तुरंत वापस लिया जाना चाहिए। मजदूरों को समय पर और सम्मानजनक न्यूनतम मजदूरी दी जानी चाहिए तथा ग्राम पंचायतों के अधिकारों को पुन: स्थापित किया जाना चाहिए। साथ ही, मनरेगा का बजट बढ़ाया जाना भी आवश्यक है ताकि जरूरतमंदों को पर्याप्त काम मिल सके।

कुमारी सैलजा ने ग्राम सभा से आह्वान किया कि वे मनरेगा की रक्षा के लिए प्रस्ताव पारित करें और मजदूरों के अधिकारों की रक्षा हेतु एकजुट रहें। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई केवल एक योजना की नहीं, बल्कि काम के अधिकार और ग्रामीण सम्मान की लड़ाई है। कार्यक्रम के अंत में ग्राम पंचायत और उपस्थित ग्रामीणों ने मनरेगा के संरक्षण तथा काम के अधिकार की बहाली के समर्थन में सामूहिक रूप से अपनी आवाज बुलंद की। यह कार्यक्रम मनरेगा बचाओ- काम का अधिकार बचाओ अभियान के अंतर्गत आयोजित किया गया, जो हरियाणा के विभिन्न जिलों में चलाया जा रहा है। इस मौके पर कांग्रेस जिलाध्यक्ष अरविंद शर्मा, विधायक बलवान सिंह दौलतपुरिया, पूर्व विधायक प्रहलाद सिंह गिलाखेड़ा, जयपाल सिंह लाली, मंगत राम लालवास, गुरदीप सिंह चहल, लाल बहादुर खोवाल, पवन भूथन, सीता राम बैनीवाल, सुभाष बिश्नोई, सुशील बिश्नोई एडवोकेट, जसमेर सिवाच जिला पार्षद, गौरव शर्मा जिला पार्षद, कल्याण सिंह भादू, देवराज हड़ौली, गुरजिंदर हड़ौली, मोहनलाल एडवोकेट, चंद्र मोहन पोटलिया, गुलाब, सुंदर, घनश्याम आनंद, शम्मी रति, मंगत राम थानेदार, सुखदेव अहरवां, निरंजन शर्मा, भूप सिंह फौजी, सहित अन्य कार्यकर्ता मौजूद थे।

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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