चंडीगढ़। ट्राइसिटी में अवैध माइनिंग का एक बड़ा और गंभीर मामला सामने आने के बावजूद चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड (सीएचबी) के आला अधिकारी रहस्यमयी चुप्पी साधे हुए हैं। आरोप है कि सीएचबी के सीईओ से लेकर चीफ इंजीनियर और इंजीनियरिंग विंग के अधिकारी इस पूरे मामले को “पुराना मामला” बताकर दबाने की कोशिश कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि सुनियोजित मिलीभगत का नतीजा है।
जानकारी के अनुसार पंचकूला क्षेत्र में चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड और हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) की कीमती जमीन से बड़े पैमाने पर मिट्टी का अवैध उठान किया गया। आरोप है कि ठेकेदारों ने सरकारी जमीन को करीब 20 फुट तक खोद दिया और वहां से निकाली गई मिट्टी को खुले बाजार में बेच दिया गया। इस अवैध माइनिंग से करोड़ों नहीं बल्कि करोड़ो रुपये के अवैध मुनाफे की आशंका जताई जा रही है।
मिट्टी के रेट से खुलता है अवैध खेल का राज
जानकारों के मुताबिक हरियाणा के सामान्य जिलों में एक एकड़ जमीन से एक फुट मिट्टी उठाने का रेट लगभग 2 लाख रुपये प्रति फुट माना जाता है, जबकि ट्राइसिटी जैसे इलाके में 35 लाख रुपये देने के बावजूद मिट्टी आसानी से उपलब्ध नहीं होती। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि इतनी महंगी मिट्टी खुले बाजार में बिक रही है, तो उसका स्रोत क्या है। स्थानीय लोगों का दावा है कि यही मिट्टी सीएचबी और एचएसवीपी की जमीन से अवैध रूप से निकाली गई।
इंजीनियरिंग विंग पर गंभीर आरोप
सूत्रों का कहना है कि इस अवैध खुदाई की जानकारी सीएचबी के चीफ इंजीनियर से लेकर इंजीनियरिंग विंग के लगभग सभी अधिकारियों को थी। इसके बावजूद न तो समय रहते काम रोका गया और न ही ठेकेदारों के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई की गई। जब शिकायतें सामने आईं, तो अधिकारियों ने इसे “पुराना मामला” बताकर फाइलों में दबाने की कोशिश की।
सड़क निर्माण के नाम पर अवैध माइनिंग
मामले से जुड़ी जानकारी के अनुसार पंचकूला के एमडीसी डॉलफिन चौक से लेकर एमडीसी सेक्टर-2 और सेक्टर-7 होते हुए सुखना लेक तक एक डिवाइडिंग रोड का निर्माण कार्य चल रहा है। इस परियोजना के लिए एचएसवीपी द्वारा करीब 6 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया गया है।
आरोप है कि सड़क निर्माण के नाम पर ठेकेदारों ने उसी स्थान से मिट्टी निकालकर सड़क में डाल दी, जबकि टेंडर की शर्तों के अनुसार मिट्टी बाहर से लाकर डालनी थी और उसके सोर्स को प्रमाणित किया जाना अनिवार्य था। हकीकत में बड़ी मात्रा में मिट्टी बाहर भी बेच दी गई, जिससे सरकारी जमीन को भारी नुकसान हुआ।
सीएचबी के सीईओ की भूमिका पर सवाल
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सीएचबी के सीईओ का ध्यान चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड की जिम्मेदारियों की बजाय नगर निगम की ओर अधिक रहता है। सीईओ के पास नगर निगम में स्पेशल कमिश्नर का भी एडिशनल चार्ज है। इसी वजह से सीएचबी से जुड़े मामलों पर निगरानी कमजोर हो रही है। हालात यह हैं कि सीएचबी के अलॉटी कभी नगर निगम तो कभी सीएचबी के दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं, जबकि अवैध माइनिंग जैसे गंभीर मामलों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही।
लोगों का आरोप है कि सीएचबी के मुखिया तक इस पूरे मामले को दबाने में लगे हुए हैं, जिससे यह संदेह और गहरा हो गया है कि अवैध माइनिंग के इस खेल में ऊपर से नीचे तक मिलीभगत है।
एचएसवीपी की जमीन से भी अवैध उठान
सूत्रों के अनुसार मामला सिर्फ सीएचबी की जमीन तक सीमित नहीं है। एचएसवीपी की जमीन से भी बड़े पैमाने पर मिट्टी का अवैध उठान किया गया है। इससे सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये के नुकसान की आशंका जताई जा रही है, लेकिन संबंधित विभाग अब तक खामोश हैं।
विजिलेंस जांच की मांग तेज
मामले के उजागर होने के बाद स्थानीय लोगों, आरडब्ल्यूए और सामाजिक संगठनों ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष विजिलेंस जांच की मांग तेज कर दी है। लोगों का कहना है कि यदि ईमानदारी से जांच कराई जाए, तो कई बड़े अधिकारी और ठेकेदार बेनकाब हो सकते हैं और अवैध माइनिंग के इस पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सकता है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रशासन इन गंभीर आरोपों को गंभीरता से लेकर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगा, या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।











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