भारत मंडपम से उठा वैश्विक संदेश: “एआई का भविष्य मुट्ठी भर देशों या अरबपतियों के हाथों में नहीं”
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के प्रतिष्ठित भारत मंडपम में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट-2026 के चौथे दिन वैश्विक राजनीति, टेक्नोलॉजी और उद्योग जगत की दिग्गज हस्तियों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के भविष्य, उसकी नैतिक दिशा और वैश्विक साझेदारी पर गहन मंथन किया। सम्मेलन को संयुक्त राष्ट्र महासचिव Antonio Guterres, गूगल के सीईओ Sundar Pichai, भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi, फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron और उद्योगपति Mukesh Ambani सहित अनेक वैश्विक नेताओं ने संबोधित किया।
16 से 20 फरवरी तक चल रहे इस पांच दिवसीय समिट की थीम ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ रखी गई है—जिसका स्पष्ट संदेश है कि एआई का विकास मानवता के समग्र कल्याण के लिए होना चाहिए, न कि सीमित हितों के लिए।
गुटेरेस का स्पष्ट संदेश: एआई का नियंत्रण लोकतांत्रिक होना चाहिए
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने अपने संबोधन में कहा कि एआई आज मानव सभ्यता के निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। यह तकनीक शिक्षा, स्वास्थ्य, अर्थव्यवस्था, सुरक्षा और शासन के हर क्षेत्र को प्रभावित कर रही है।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा:
“एआई का भविष्य मुट्ठी भर देशों या कुछ अरबपतियों द्वारा तय नहीं किया जा सकता। इसे वैश्विक सार्वजनिक हित के रूप में देखा जाना चाहिए।”
गुटेरेस ने चेताया कि यदि एआई का नियमन पारदर्शी और समावेशी नहीं होगा तो यह असमानताओं को और बढ़ा सकता है। उन्होंने जोर दिया कि एआई गवर्नेंस ढांचा मानवाधिकार आधारित, जवाबदेह और बहुपक्षीय होना चाहिए।
संयुक्त राष्ट्र का मानना है कि एआई लगभग 80 प्रतिशत सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को गति दे सकता है। गरीबी उन्मूलन, जलवायु परिवर्तन, स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और शिक्षा के क्षेत्र में एआई की अपार संभावनाएं हैं।
उन्होंने कहा,
“असली प्रभाव का अर्थ है ऐसी टेक्नोलॉजी जो जीवन को बेहतर बनाए और धरती की रक्षा करे। हमें एआई को ‘डिफॉल्ट रूप से’ इंसान की गरिमा के साथ डिजाइन करना होगा।”
प्रधानमंत्री मोदी: “एआई न्यूक्लियर पावर की तरह—वरदान भी, विनाश भी”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एआई की तुलना न्यूक्लियर पावर की खोज से करते हुए कहा कि मानव इतिहास ने यह देखा है कि एक ही तकनीक सकारात्मक परिवर्तन भी ला सकती है और विनाश भी।
उन्होंने कहा:
“हमने न्यूक्लियर पावर की तबाही भी देखी है और उसका सकारात्मक योगदान भी। एआई भी वैसी ही परिवर्तनकारी शक्ति है, जिसके लिए सही दिशा और जिम्मेदार नेतृत्व जरूरी है।”
प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत एआई को डर के नजरिए से नहीं, बल्कि अवसर के रूप में देखता है।
“कुछ लोग एआई में डर देखते हैं, लेकिन भारत एआई में अपना भविष्य देखता है।”
उन्होंने कहा कि एआई को लोकतांत्रिक बनाना होगा ताकि कोई भी व्यक्ति केवल डेटा प्वाइंट या कच्चा माल बनकर न रह जाए।
प्रधानमंत्री ने डिजिटल कंटेंट के लिए “न्यूट्रिशन लेबल” की तरह “डिजिटल ऑबेसिटी लेबल” की अवधारणा भी रखी, जिससे लोगों को यह समझने में मदद मिले कि वे किस प्रकार का कंटेंट उपभोग कर रहे हैं।
उन्होंने जोर देकर कहा कि आज का असली सवाल यह नहीं है कि एआई भविष्य में क्या कर सकता है, बल्कि यह है कि हम आज इसके साथ क्या कर रहे हैं।
भारत का डिजिटल मॉडल: दुनिया के लिए उदाहरण
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भारत की डिजिटल क्रांति की खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा कि एक दशक पहले दुनिया को लगता था कि 1.4 अरब लोगों को डिजिटल इकोनॉमी से जोड़ना असंभव है, लेकिन भारत ने इसे संभव कर दिखाया।
मैक्रों ने कहा:
“आज भारत में एक रेहड़ी-पटरी वाला भी अपने मोबाइल फोन से ऑनलाइन पेमेंट ले सकता है। यह डिजिटल लोकतंत्रीकरण का सबसे बड़ा उदाहरण है।”
उन्होंने भारत की डिजिटल पहचान प्रणाली और भुगतान अवसंरचना को अभूतपूर्व बताया। उनका कहना था कि एआई हेल्थकेयर, ऊर्जा, कृषि, परिवहन और सार्वजनिक सेवाओं में क्रांतिकारी परिवर्तन ला सकता है।
मैक्रों ने कहा कि भारत और फ्रांस इस तकनीकी क्रांति में साझेदार हैं और एआई को मानवता की भलाई के लिए विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
15 अरब डॉलर का निवेश: भारत बनेगा वैश्विक एआई हब
गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने भारत में तकनीकी विकास की रफ्तार की प्रशंसा करते हुए अपने छात्र जीवन की यादें साझा कीं। उन्होंने बताया कि कैसे विशाखापत्तनम जैसे शहर अब वैश्विक एआई रणनीति के केंद्र में आ रहे हैं।
पिचाई ने घोषणा की कि गूगल भारत में 15 अरब डॉलर के इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश के तहत एक फुल-स्टैक एआई हब स्थापित कर रहा है।
इस हब में:
गीगावाट स्केल कंप्यूटिंग क्षमता होगी
इंटरनेशनल सबसी केबल गेटवे बनाया जाएगा
हजारों रोजगार सृजित होंगे
भारतीय स्टार्टअप और डेवलपर्स को अत्याधुनिक एआई टूल्स मिलेंगे
उन्होंने कहा:
“हर बार जब मैं भारत आता हूं, बदलाव की रफ्तार देखकर हैरान रह जाता हूं।”
मुकेश अंबानी: भारत के एआई इकोसिस्टम को मिलेगा उद्योग का समर्थन
उद्योगपति मुकेश अंबानी ने अपने संबोधन में कहा कि भारत के पास डेटा, युवा प्रतिभा और डिजिटल अवसंरचना का अद्वितीय संयोजन है।
उन्होंने कहा कि एआई भारत के लिए केवल तकनीकी क्रांति नहीं, बल्कि आर्थिक और सामाजिक परिवर्तन का माध्यम है।
एआई आधारित हेल्थकेयर समाधान
स्मार्ट कृषि मॉडल
डिजिटल शिक्षा प्लेटफॉर्म
ऊर्जा दक्षता में सुधार
अंबानी ने कहा कि भारत को एआई में आत्मनिर्भर और वैश्विक नेतृत्वकर्ता बनने की दिशा में काम करना चाहिए।
समिट का व्यापक उद्देश्य
इस पांच दिवसीय समिट का मकसद केवल तकनीकी चर्चा नहीं, बल्कि नीति, नैतिकता और सामाजिक प्रभाव पर संवाद स्थापित करना है।
समिट तीन मूल स्तंभों पर आधारित है:
लोग (People) – मानव-केंद्रित एआई
ग्रह (Planet) – सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण
प्रगति (Progress) – साझा आर्थिक विकास
सम्मेलन में वैश्विक नीति निर्माताओं, स्टार्टअप संस्थापकों, टेक कंपनियों, शिक्षाविदों और शोधकर्ताओं ने भाग लिया।
एआई: अवसर और चुनौतियां
विशेषज्ञों का मानना है कि एआई के माध्यम से:
चिकित्सा निदान तेज़ और सटीक होगा
जलवायु परिवर्तन के समाधान मिलेंगे
शिक्षा व्यक्तिगत और सुलभ बनेगी
सरकारी सेवाएं पारदर्शी होंगी
लेकिन इसके साथ ही चुनौतियां भी हैं:
डेटा गोपनीयता
साइबर सुरक्षा
फेक न्यूज और डीपफेक
रोजगार पर प्रभाव
इसीलिए समिट में एआई गवर्नेंस के लिए वैश्विक सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
भविष्य की दिशा: मानवता केंद्र में
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन के अंत में कहा कि एआई को मशीन-केंद्रित से इंसान-केंद्रित बनाना ही इस युग की सबसे बड़ी चुनौती है।
उन्होंने कहा:
“आज की पीढ़ी के साथ-साथ हमें यह भी सोचना होगा कि हम आने वाली पीढ़ियों को एआई का कैसा रूप सौंपेंगे।”
भारत मंडपम से उठी यह आवाज़ केवल तकनीकी प्रगति की नहीं, बल्कि नैतिक जिम्मेदारी की भी है।
इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट-2026 ने यह स्पष्ट कर दिया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस केवल एल्गोरिद्म और डेटा का विषय नहीं है, बल्कि यह मानवता के भविष्य से जुड़ा प्रश्न है।
जहां एक ओर वैश्विक नेता इसके लोकतांत्रिक और समावेशी उपयोग पर जोर दे रहे हैं, वहीं टेक कंपनियां भारत को वैश्विक एआई हब बनाने के लिए बड़े निवेश की घोषणा कर रही हैं।
भारत ने इस मंच से यह संदेश दिया है कि एआई का भविष्य केवल तकनीकी श्रेष्ठता से नहीं, बल्कि नैतिक दृष्टिकोण और मानव कल्याण के संकल्प से तय होगा।
‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ की भावना के साथ यह समिट वैश्विक एआई संवाद में भारत की निर्णायक भूमिका को स्थापित करता है।











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