19 फरवरी को हरियाणा पुलिस सेवा नियमावली, 2002 में संशोधन; 2019 के प्रावधान में जोड़ी गई नई शर्त
रमेश गोयत
चंडीगढ़: हरियाणा सरकार ने 19 फरवरी को एक अहम गजट नोटिफिकेशन जारी करते हुए हरियाणा पुलिस सेवा नियमावली, 2002 के नियम 7 के टिप्पण (नोट) में संशोधन किया है। इस संशोधन के अनुसार अब पुलिस उप-अधीक्षक (डीएसपी) के रूप में 10 वर्ष की नियमित सेवा पूरी करने वाले अधिकारियों को अपर/अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एडिशनल एसपी) के रूप में तभी पदांकित किया जाएगा, जब संबंधित रैंक का रिक्त पद उपलब्ध होगा।
यह गजट अधिसूचना हरियाणा सरकार के गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव (एसीएस) सुधीर राजपाल के हस्ताक्षर से प्रकाशित की गई है और 19 फरवरी से प्रभावी मानी जाएगी।
क्या है नया प्रावधान?
संशोधित नियम के अनुसार, 10 वर्ष की नियमित सेवा पूरी करने वाले डीएसपी को उनके ही वेतनमान में अपर पुलिस अधीक्षक के रूप में पुनः पदाभिहीत किया जाएगा, लेकिन यह तभी संभव होगा जब एडिशनल एसपी रैंक का पद खाली हो।
स्पष्ट रहे कि यह कोई पदोन्नति (प्रमोशन) नहीं है, बल्कि केवल पदनाम (डिज़िग्नेशन) में बदलाव होता है। एडिशनल एसपी के रूप में पदांकित होने के बावजूद अधिकारी का वेतन डीएसपी रैंक के अनुसार ही रहेगा।

2019 में नहीं थी रिक्त पद की शर्त
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट एवं प्रशासनिक मामलों के जानकार हेमंत कुमार के अनुसार, 20 फरवरी 2019 को इसी नियम में एक नोट जोड़कर प्रावधान किया गया था कि 10 वर्ष की नियमित सेवा पूरी करने वाले डीएसपी को उनके वेतनमान में अपर पुलिस अधीक्षक के रूप में पुनः पदाभिहीत किया जाएगा।
उस समय नियम में रिक्त पद की उपलब्धता की कोई शर्त नहीं थी। इसका अर्थ यह था कि 20 फरवरी 2019 से 19 फरवरी 2026 तक सात वर्षों की अवधि में 10 साल की सेवा पूरी करने वाले प्रत्येक डीएसपी को एडिशनल एसपी के रूप में पदांकित किया जा सकता था, भले ही पद रिक्त हो या न हो।
अब क्या बदलेगा?
ताजा संशोधन के बाद स्थिति बदल गई है। अब एडिशनल एसपी के पद पर पदांकन तभी संभव होगा जब उस रैंक का रिक्त पद उपलब्ध होगा। इससे विभाग में पद संरचना (कैडर मैनेजमेंट) अधिक नियंत्रित होगी और पदों की संख्या संतुलित रखी जा सकेगी।
इस बदलाव को प्रशासनिक सुधार और पदानुक्रम में संतुलन बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।











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