गुरु -चेला हर दिन प्रदेश की राजनीति मे लिख रहे नई ईबारत
पवन चोपड़ा
चंडीगढ़ । आज से लगभग 12 वर्ष पहले 2014 बीजेपी को हरियाणा की राजनीति मे पीएम नरेंद्र मोदी की अगुवाई मे पहली बार मिले बहुमत ने एक ऐसी हस्ती को सत्ता की कमान सौंपी। जिसका विपक्ष तो क्या बीजेपी को भी यह एहसास नहीं था कि कई दशकों से देशभर के राजनीतिक ढर्रे को धत्ता बताते हुए यह व्यक्ति मनोहर लाल हरियाणा के राजनीतिक इतिहास में एक नई ईबारत लिखने का काम करेगा। जिसका तोड़ विपक्ष के लिए तीसरी बार भी एक अनसुलझी पहेली बना हुआ है।
जहां गुरु चेला नायब और मनोहर की जोड़ी के सामने प्रदेश के तमाम राजनीतिक पंडित चारों खाने कर दिया। पहली बार प्रदेश के राजनीतिक इतिहास में लगातार तीसरी बार सरकार बना ऐसी लकीर खींच डाली शायद ही भविष्य में कोई राजनीतिक दल इससे पार पाना तो दूर शायद ही इसे छू भी न सके।
*रिजल्ट से पहले ही आ जाते थे सगे संबंधियों के नाम*
भाजपा से पूर्व की सरकारों में जैसे ही लोक सेवा आयोग के पदों में हरियाणा सिविल सर्विस, डीएसपी, डीईटीसी, प्रोफेसर, उप मंडल अधिकारी या इंस्पेक्टर रैंक पर लगने वाले राजनेताओं के चहेतों नाम पहले से ही वायरल हो जाते थे। इन पदों पर लगना तो दूर कल्पना करना भी आम व्यक्ति तो क्या खास के लिए भी दूर की कौड़ी थे। लेकिन जैसे ही आरएसएस के विशुद्ध खाटी प्रचारक और नरेंद्र मोदी के खास व विश्वास पात्रों में शुमार मनोहर लाल ने सत्ता संभालते ही बिना खर्ची बिना पर्ची पारदर्शिता और योग्यता के बल पर युवाओं को रोजगार देने की ऐसी शुरुआत की इसके बारे में कोई
सोचना तो दूर कल्पना भी भी नहीं कर सकता था। क्योंकि पहले बड़े राजनीतिक रसूख और बड़ी थैली वालों को ही अच्छे और मलाईदार पदों पर नियुक्ति मिलती थी।
वहीं मनोहर सरकार मे बिना किसी राजनीतिक पहुंच और सिफारिश या रिश्वत मतलब बिना खर्ची पर्ची के ऐसे युवाओं को उनकी योग्यता के मुताबिक रोजगार मिला। जिनकी ना ही कोई राजनीतिक पहचान थी और ना ही इतनी हैसियत थी कि वे किसी भी प्रकार का नजराना दे सके।
: *जन नेता के रूप में उभरे सीएम सैनी*
जैसे ही व्यक्ति किसी बड़े पद पर आसीन होता है तो उसकी गरिमा और व्यस्तताओं के चलते आमजन और उस पद पर आसीन व्यक्ति के बीच में दूरियां बढ़ती चली जाती है। लेकिन जब से नायब सैनी मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है । उन्होंने तभी से जहां हरियाणा मुख्यमंत्री आवास के दरवाजे 24 घंटे खोले हैं ।वहीं प्रदेश का कोई भी जनसाधारण व्यक्ति उनसे कभी भी मिल सकता है। वहीं वे भी राजनीतिक आडंबर को त्याग आम व्यक्ति के पास पहुंचकर जहां उसका कुशल कक्षेम ही नही जानते। बल्कि उनकी समस्या सुन मौके पर ही उसका समाधान करने का प्रयास भी करते हैं।
*नायब ,मनोहर राजनीति में विरले चेहरे*
अक्सर राजनीति में कोई भी राजनेता दूसरे राजनेता को खुद से आगे बढ़ते देखना पसंद नहीं करता और आए दिन किसी न किसी प्रकार से अपने राजनीतिक प्रतिद्वंदी की राह में कांटे बिछाने का काम करता है।
। लेकिन इन सब बातों से उल्ट मनोहर और नायब की जोड़ी राजनीति के इन सभी मिथकों तोड़ रही है। जहां केंद्रीय नेतृत्व के आदेश पर मनोहर लाल ने बिना किसी हिचकिचाहट के एक पल में ही मुख्यमंत्री पद को त्याग दिया। वहीं नायब सैनी भी आज भी मनोहर लाल को लेकर वही आदर भाव अपनाए हुए हैं। फिलहाल जिस प्रकार से गुरु चेले की है जोड़ी बिना किसी राजनीति प्रतिद्वंता के एक दूसरे का पूरक बन आगे बढ़ रही है। ऐसे में भाजपा के सुनहरे भविष्य मे अभी और चार चांद लगने बाकी है











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