जींद। हरियाणा के जींद में बुधवार का दिन भारतीय रेल इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया, जब देश की पहली हाइड्रोजन आधारित ट्रेन का रनिंग ट्रायल सफलतापूर्वक शुरू किया गया। इसे पर्यावरण-अनुकूल परिवहन की दिशा में एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।
सुबह करीब सात बजे ट्रेन को जींद यार्ड से बाहर निकाला गया। प्रारंभिक चरण में इसे डीजल इंजन की सहायता से हांसी रोड पुल तक ले जाया गया। इसके बाद सुबह 8 बजकर 25 मिनट पर ट्रेन को सोनीपत की दिशा में रवाना किया गया। पूरे ट्रायल के दौरान रेलवे अधिकारियों और तकनीकी विशेषज्ञों की टीम मौके पर मौजूद रही।
ट्रायल में तकनीकी पहलुओं की गहन जांच
रनिंग ट्रायल के दौरान इंजन की गति, ब्रेकिंग सिस्टम, ईंधन खपत, सुरक्षा मानक, ट्रैक की स्थिति और सिग्नलिंग सिस्टम की बारीकी से निगरानी की जा रही है। सुरक्षा के मद्देनजर हाइड्रोजन गैस की सीमित मात्रा ही भरी गई है, ताकि आवश्यकता पड़ने पर तुरंत डीजल इंजन जोड़ा जा सके। रेलवे की तकनीकी टीम सुबह से पूरी सतर्कता के साथ परीक्षण में जुटी रही।
जींद से भम्भेवा तक पहला चरण
ट्रेन की शुरुआती यात्रा जींद से पिंडारा होते हुए भम्भेवा स्टेशन तक तय की गई। इस चरण में डीजल इंजन को अलग कर ट्रेन को पूरी तरह हाइड्रोजन गैस पर चलाने का परीक्षण किया जाएगा। यदि यह ट्रायल सफल रहता है तो जल्द ही इसे जींद–सोनीपत रूट पर नियमित यात्री सेवा में शामिल किया जा सकता है। वर्तमान में इस रूट पर तीन ट्रेनें संचालित हो रही हैं।
इंटीग्रल कोच फैक्टरी में हुआ निर्माण
यह अत्याधुनिक ट्रेन चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्टरी (आईसीएफ) में विकसित की गई है। इसे दुनिया की सबसे लंबी और शक्तिशाली हाइड्रोजन ट्रेनों में से एक माना जा रहा है। ट्रेन में 1200 हॉर्सपावर का इंजन लगाया गया है। इसकी अधिकतम डिजाइन स्पीड 150 किलोमीटर प्रति घंटा है, जबकि सामान्य संचालन में यह 110 से 140 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से चलेगी।
सफर होगा तेज और आरामदायक
ट्रेन के नियमित संचालन के बाद जींद से सोनीपत के बीच लगभग 90 किलोमीटर का सफर, जो वर्तमान में करीब दो घंटे में पूरा होता है, घटकर एक घंटे से भी कम समय में तय किया जा सकेगा। ट्रेन के संचालन के दौरान शोर बेहद कम होगा, जिससे यात्रियों को अधिक आरामदायक अनुभव मिलेगा। इसमें आठ से दस डिब्बे होंगे और इसकी यात्री क्षमता डीजल ट्रेनों के बराबर होगी।
हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक कैसे करेगी काम
यह ट्रेन हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक पर आधारित है। डीजल के स्थान पर हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के नियंत्रित संयोजन से बिजली उत्पन्न की जाएगी। यह ऊर्जा लिथियम आयन बैटरी को चार्ज करेगी, जिससे ट्रेन संचालित होगी। इस प्रक्रिया में धुएं की जगह केवल भाप और पानी निकलेगा। ट्रेन में बैटरी और सुपर कैपेसिटर जैसे ऊर्जा भंडारण सिस्टम लगाए गए हैं, जिससे यह हाइब्रिड मॉडल के रूप में कार्य करेगी।
जीरो एमिशन की दिशा में बड़ा कदम
ग्रीन हाइड्रोजन और शून्य उत्सर्जन रेल यात्रा की दिशा में यह परियोजना मील का पत्थर साबित हो सकती है। जींद जंक्शन पर करीब 120 करोड़ रुपये की लागत से समर्पित हाइड्रोजन उत्पादन और रिफ्यूलिंग प्लांट स्थापित किया गया है। इस प्लांट को प्रति घंटे लगभग 40 हजार लीटर पानी की आवश्यकता होगी, जिसके लिए स्टेशन की छतों पर वर्षा जल संचयन की विशेष व्यवस्था की गई है।
तकनीकी चुनौतियों से पार पाने की तैयारी
एक जनवरी को यह ट्रेन दिल्ली से जींद जंक्शन पहुंची थी, जबकि पांच जनवरी को लखनऊ से विशेष कोच के माध्यम से वायरिंग का सामान लाया गया था। कड़ाके की ठंड के कारण हाइड्रोजन गैस में नमी आने से भराव प्रक्रिया में तकनीकी दिक्कतें आई थीं, जिन्हें अब काफी हद तक दूर कर लिया गया है। रेलवे इंजीनियरों की टीम लगातार इन चुनौतियों पर काम कर रही थी।
भारत बनेगा पांचवां देश
परियोजना के पूरी तरह सफल होने पर जर्मनी, स्वीडन, जापान और चीन के बाद भारत हाइड्रोजन ट्रेन संचालन करने वाला पांचवां देश बन जाएगा। यह उपलब्धि ‘मेक इन इंडिया’ और आत्मनिर्भर भारत अभियान को नई मजबूती देगी। साथ ही भविष्य में गैर-विद्युतीकृत रेल मार्गों पर भी हाइड्रोजन ट्रेनों के संचालन का रास्ता खुलेगा।
सुरक्षा सर्वोपरि, जनता से अपील
रेलवे प्रशासन ने ट्रायल के दौरान आम नागरिकों से ट्रैक के पास भीड़ न लगाने और सुरक्षा नियमों का पालन करने की अपील की है। यदि मौजूदा रनिंग ट्रायल पूरी तरह सफल रहता है, तो जल्द ही नियमित संचालन की आधिकारिक घोषणा की जा सकती है।
देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का यह ट्रायल भारतीय रेलवे के इतिहास में हरित, आधुनिक और आत्मनिर्भर भविष्य की मजबूत शुरुआत माना जा रहा है।











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