राष्ट्र ने किया नमन, ‘प्राइड ऑफ नेशन 2026’ अवार्ड से बढ़ाया गौरव
चंडीगढ़/विशाखापत्तनम। आर्यम इंटरनेशनल फाउंडेशन के संस्थापक-अध्यक्ष और विश्वविख्यात आध्यात्मिक गुरु Prof. Pushpendra Kumar Arya, जिन्हें श्रद्धालु गुरुदेव आर्यम के नाम से जानते हैं, को प्रतिष्ठित ‘प्राइड ऑफ नेशन 2026’ अवार्ड से सम्मानित किया गया।
यह सम्मान आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम स्थित Novotel Visakhapatnam Varun Beach में आयोजित एक भव्य समारोह में प्रदान किया गया। कार्यक्रम का आयोजन Asia Today Media द्वारा किया गया।
राज्यपाल ने किया सम्मानित
इस अवसर पर ओडिशा के माननीय राज्यपाल Hari Babu Kambhampati ने मुख्य अतिथि के रूप में गुरुदेव आर्यम को यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया।
कार्यक्रम में भारत सरकार के केंद्रीय राज्यमंत्री S. P. Singh Baghel (पशुपालन, डेयरी एवं पंचायती राज), केंद्रीय राज्यमंत्री B. S. Srinivasa Varma (भारी उद्योग एवं इस्पात) तथा राज्यसभा सांसद G. V. L. Narasimha Rao विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
‘लीडिंग स्पिरिचुअल एंड सोशल ट्रांसफॉर्मेशन फाउंडेशन ऑफ द ईयर’
आर्यम इंटरनेशनल फाउंडेशन को यह सम्मान ‘लीडिंग स्पिरिचुअल एंड सोशल ट्रांसफॉर्मेशन फाउंडेशन ऑफ द ईयर’ की श्रेणी में प्रदान किया गया। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2026 में इस श्रेणी में सम्मानित होने वाली यह देश की एकमात्र संस्था रही।
यह उपलब्धि गुरुदेव आर्यम की आध्यात्मिक साधना, धर्म के प्रति समर्पण और मानव सेवा के क्षेत्र में उनके निरंतर योगदान का प्रमाण मानी जा रही है।
राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित सम्मान
‘प्राइड ऑफ नेशन अवार्ड’ भारत एवं विश्वभर में उत्कृष्ट उपलब्धियां हासिल करने वाले भारतीयों को सम्मानित करने वाला एक अग्रणी राष्ट्रीय सम्मान है। यह कला, मनोरंजन, खेल, मीडिया, राजनीति, शिक्षा, चिकित्सा, व्यापार, समाज सेवा, वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण जैसे विविध क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली हस्तियों और संस्थाओं को मान्यता देता है।
पूर्व वर्षों में यह सम्मान महाराष्ट्र, तेलंगाना और कर्नाटक के राज्यपालों तथा पद्मश्री सम्मानित विभूतियों द्वारा भी प्रदान किया जा चुका है।
विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि वर्ष 2026 में आध्यात्म, धर्म एवं पर्यावरण के क्षेत्र से आर्यम इंटरनेशनल फाउंडेशन एकमात्र संस्था रही, जिसे इस प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मान से विभूषित किया गया।
गुरुदेव आर्यम ने सम्मान प्राप्ति के बाद इसे राष्ट्र, अपने अनुयायियों और मानवता की सेवा को समर्पित करते हुए कहा कि उनका लक्ष्य समाज में आध्यात्मिक जागरण और सकारात्मक परिवर्तन की अलख जगाना है











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