चंडीगढ़/नई दिल्ली, 28 फरवरी 2026 (शनिवार):
आज फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस तिथि का अधिपत्य भगवान भगवान विष्णु के हाथ में माना जाता है। यह दिन नई योजनाएं बनाने, रणनीति विकसित करने, धन दान, व्रत-उपवास तथा धार्मिक अनुष्ठानों के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। आज अमलकी एकादशी का पारण भी किया जाएगा।
28 फरवरी 2026 का पंचांग
विक्रम संवत: 2082
मास: फाल्गुन
पक्ष: शुक्ल पक्ष
तिथि: द्वादशी
दिन: शनिवार
योग: सौभाग्य
नक्षत्र: पुनर्वसु
करण: बव
चंद्र राशि: कर्क
सूर्य राशि: कुंभ
सूर्योदय: सुबह 06:48 बजे
सूर्यास्त: शाम 06:19 बजे
चंद्रोदय: दोपहर 03:09 बजे
चंद्रास्त: सुबह 05:22 बजे (1 मार्च)
राहुकाल: 09:41 से 11:07 बजे तक
यमगंड: 14:00 से 15:27 बजे तक
पुनर्वसु नक्षत्र में यात्रा और पूजा का शुभ संयोग
आज चंद्रमा कर्क राशि में और पुनर्वसु नक्षत्र में स्थित रहेंगे। यह नक्षत्र मिथुन राशि के 20:00 अंश से कर्क राशि के 3:20 अंश तक विस्तृत है। पुनर्वसु नक्षत्र की अधिष्ठात्री देवी अदिति मानी जाती हैं तथा इसके स्वामी ग्रह बृहस्पति हैं।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यह नक्षत्र अस्थायी, तेज और गतिशील प्रकृति का होता है। ऐसे में आज का दिन—
नया वाहन खरीदने या सर्विसिंग कराने,
यात्रा प्रारंभ करने,
पूजा-पाठ और धार्मिक कार्यों,
बागवानी करने,
मित्रों से मिलने या सामाजिक कार्यक्रमों में भाग लेने
के लिए अनुकूल माना गया है।
अमलकी एकादशी का पारण आज
एकादशी व्रत रखने वाले श्रद्धालु आज द्वादशी तिथि में पारण करेंगे। पारण का विशेष महत्व होता है, क्योंकि इसी के साथ व्रत पूर्ण माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि विधिपूर्वक पारण करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
आज के दिन का वर्जित समय
आज सुबह 09:41 से 11:07 बजे तक राहुकाल रहेगा। इस अवधि में कोई भी शुभ कार्य प्रारंभ करने से बचना चाहिए।
इसी प्रकार यमगंड काल (14:00 से 15:27 बजे), गुलिक काल, दुमुहूर्त एवं वर्ज्यम में भी मांगलिक कार्यों से परहेज करने की सलाह दी जाती है।
धार्मिक दृष्टि से आज का दिन सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर माना जा रहा है। विशेषकर दान-पुण्य, सत्संग और विष्णु पूजन से मानसिक शांति और आध्यात्मिक लाभ प्राप्त हो सकता है।










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