September 21, 2026 1:11 pm

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दिल्ली विधानसभा में बंदरों का आतंक, सरकार करेगी ‘मंकी एक्सपर्ट’ की भर्ती

PWD ने जारी किया टेंडर, लंगूर की आवाज निकालकर भगाए जाएंगे बंदर

नई दिल्ली: दिल्ली विधानसभा और आसपास स्थित सरकारी इमारतों में बंदरों की बढ़ती संख्या से हो रही परेशानियों को देखते हुए दिल्ली सरकार ने बड़ा कदम उठाने की तैयारी की है। विधायकों, कर्मचारियों और विजिटर्स की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अब विशेष रूप से प्रशिक्षित लोगों की भर्ती की जाएगी, जो लंगूर की आवाज निकालकर बंदरों को भगाने का काम करेंगे। इस संबंध में दिल्ली सरकार के लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने टेंडर जारी कर दिया है।
टेंडर के अनुसार, पीडब्ल्यूडी ऐसे अनुभवी लोगों की तलाश कर रहा है जो लंगूर जैसी आवाज निकालने में दक्ष हों और दिल्ली विधानसभा परिसर, शिक्षा निदेशालय तथा सिविल लाइन्स स्थित विकास भवन को बंदरों से मुक्त रख सकें। दरअसल, इन इलाकों में बंदरों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिससे न सिर्फ कामकाज प्रभावित हो रहा है बल्कि कर्मचारियों में डर का माहौल भी बना हुआ है।
पहले से तैनात हैं मंकी एक्सपर्ट
दिल्ली विधानसभा परिसर में बंदर भगाने के लिए पहले से ही पांच ‘मंकी एक्सपर्ट’ तैनात हैं। इनमें से एक रवि कुमार पिछले 15 वर्षों से इस काम में जुटे हुए हैं। रवि ने बताया कि उनकी टीम दिल्ली विधानसभा के अलावा संसद भवन, साउथ ब्लॉक, नॉर्थ ब्लॉक और कई अन्य सरकारी मंत्रालयों की इमारतों में भी सेवाएं दे चुकी है।
उन्होंने बताया कि बंदरों को भगाने का सबसे सुरक्षित और प्रभावी तरीका लंगूर की आवाज निकालना है, जिससे बिना किसी नुकसान के बंदर खुद ही इलाके से दूर चले जाते हैं। पहले इन परिसरों में असली लंगूर रखे जाते थे, लेकिन पशु अधिकारों से जुड़े विरोध के बाद लंगूर बांधकर रखने पर रोक लगा दी गई। इसके बाद से आवाज के जरिए बंदर भगाने की व्यवस्था लागू की गई।

आसान नहीं है लंगूर की आवाज निकालना
रवि कुमार के अनुसार, यह काम स्पेशल सिक्योरिटी के अंतर्गत आता है और इसके लिए अनुभव बेहद जरूरी है। बिना ट्रेनिंग और अभ्यास के लंगूर की आवाज निकालना आसान नहीं होता। उनकी टीम 8-8 घंटे की शिफ्ट में काम करती है और सभी को दिल्ली सरकार द्वारा तय न्यूनतम मजदूरी के अनुसार 18 से 20 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन मिलता है।
उन्होंने बताया कि बंदर भगाने के साथ-साथ उनकी टीम जानवरों के रेस्क्यू का काम भी करती है और कई एनजीओ के साथ जुड़कर सेवाएं देती है। अब इस तरह की सेवाओं की मांग बढ़ रही है और निजी तौर पर भी लोग अपने घरों में बंदरों से निजात पाने के लिए ऐसे विशेषज्ञों को नियुक्त कर रहे हैं।
रवि ने बताया कि पहले बंदरों को भगाने के लिए गुलेल, डंडा और अन्य साधनों का इस्तेमाल किया जाता था, लेकिन अब इन सबकी जगह लंगूर की आवाज ने ले ली है, जो सबसे सुरक्षित, सरल और कारगर तरीका साबित हो रहा है।

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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