डॉ विजय चावला ने दीक्षा पोर्टल पर शिक्षा के क्षेत्र में रोबोटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस शीर्षक कोर्स में प्राप्त किए शत-प्रतिशत अंक
कैथल। आरोही स्कूल ग्योंग में कार्यरत हिंदी प्राध्यापक डॉ विजय चावला ने बताया कि केंद्रीय शैक्षिक प्रौद्योगिकी संस्थान, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) नई दिल्ली द्वारा दीक्षा पोर्टल पर गूगल फॉर एजुकेशन के साथ मिलकर 6 घंटों का शिक्षा के क्षेत्र में रोबोटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कोर्स प्रकाशित किया गया है। डॉ चावला ने बताया कि यह कोर्स छह सत्रों वाला प्रशिक्षण कार्यक्रम है जिसमें प्रत्येक सत्र लगभग 1 घंटा का है, यानी कुल सीखने का समय लगभग 6 घंटे का है। यह कोर्स सीधे रोबोटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के शैक्षिक उपयोग पर केंद्रित है और शिक्षकों, शिक्षार्थियों तथा सभी शिक्षा‑से जुड़े लोगों के लिए शैक्षिक सामग्री प्रदान की गई है। उन्होंने इस कोर्स को आज सफलतापूर्वक सम्पन्न कर लिया है । इस कोर्स में कुल 50 प्रश्न दिए गए हैं इनमें से 35 प्रश्नों के सही उत्तर देने पर ही प्रमाण पत्र प्रदान किया जाता है। डॉ चावला ने बताया कि उन्होंने अपने इस 75 वें कोर्स की प्रश्नोत्तरी में 50 में से 50 अंक प्राप्त कर कोर्स को सफलतापूर्वक संपन्न कर लिया है और उन्हें प्रमाण पत्र भी मिल गया है। चावला ने आगे बताया कि आज की दुनिया में शिक्षा सिर्फ किताबों और कक्षाओं तक सीमित नहीं रही। तकनीकी विकास ने शिक्षण और सीखने के तरीकों में क्रांतिकारी बदलाव ला दिया है। इसमें रोबोटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सबसे महत्वपूर्ण तकनीक बनकर उभरी हैं। ये सृजनात्मक, व्यावहारिक और डेटा‑सक्षम शिक्षा के साधन हैं। इनके माध्यम से छात्र न केवल आधुनिक तकनीक सीखते हैं, बल्कि समस्या सुलझाने, टीम वर्क और नवाचार जैसे महत्वपूर्ण कौशल भी विकसित करते हैं। शिक्षा में इन तकनीकों का सही इस्तेमाल भविष्य की स्मार्ट, व्यक्तिगत और प्रभावशाली शिक्षा सुनिश्चित करता है। भाषा शिक्षण में रोबोटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस परंपरागत शिक्षा की सीमाओं को तोड़ते हैं। ये तकनीकें सीखने को अधिक इंटरेक्टिव, व्यक्तिगत और प्रभावशाली बनाती हैं। इनसे विद्यार्थियों को उच्चारण, व्याकरण, संवाद और रचनात्मक कौशल में सुधार करने का अवसर मिलते हैं। चावला ने बताया कि वे भाषा शिक्षण में इंटरैक्टिव रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का प्रयोग विद्यार्थियों के आकलन में वे सफलतापूर्वक कर चुके हैं।

डॉ चावला का मानना है कि रोबोटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के साथ भाषा सीखना अब होगा आसान। शिक्षा में रोबोटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का सही इस्तेमाल भाषा सीखने की प्रक्रिया को सरल और आकर्षक बना देता है।










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