11 आरोपी गिरफ्तार, 16 स्थानों पर छापेमारी; कई वाहन, संपत्तियां और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त
चंडीगढ़। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक से जुड़े बहुचर्चित घोटाले की जांच में राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (SV&ACB) को कई चौंकाने वाले खुलासे मिले हैं। जांच में सामने आया है कि मुख्य आरोपियों ने कई फर्जी फर्म और कंपनियां बनाकर सरकारी विभागों के खातों से धन को अवैध रूप से ट्रांसफर किया और उसे विभिन्न निजी खातों में पहुंचाया। इस घोटाले में अब तक 100 से अधिक बैंक खातों को फ्रीज करने की प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है, जबकि 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
फर्जी कंपनियों के जरिए किया जा रहा था पैसा ट्रांसफर
प्रारंभिक जांच में पता चला है कि आरोपियों ने कई फर्जी कंपनियां बनाकर सरकारी विभागों से निकलने वाले धन को इन कंपनियों के खातों में ट्रांसफर कराया। जिन कंपनियों का नाम सामने आया है, उनमें R S Traders, Cap Co Fintech Services, SRR Planning Gurus Pvt. Ltd. और Swastik Desh Project प्रमुख हैं। इन कंपनियों के खातों में सरकारी धन अनधिकृत तरीके से भेजा जाता था और बाद में उसे अन्य खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता था।
एडीजीपी चारू बाली ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी जानकारी
मामले की जानकारी देते हुए राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की एडीजीपी Charu Bali ने पंचकूला में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि 23 फरवरी 2026 को एसवी एंड एसीबी थाना पंचकूला में IDFC First Bank और AU Small Finance Bank के अज्ञात कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।
जांच में अब तक 8 सरकारी विभागों के 12 बैंक खातों की संलिप्तता सामने आई है। इनमें से 10 खाते IDFC First Bank की सेक्टर-32 चंडीगढ़ शाखा में और 2 खाते AU Small Finance Bank में संचालित पाए गए हैं।

11 आरोपी गिरफ्तार, बैंक और सरकारी कर्मचारी भी शामिल
इस मामले में अब तक 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें
6 बैंक कर्मचारी
4 निजी व्यक्ति
1 सरकारी कर्मचारी
शामिल हैं। इनमें से 10 आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं, जबकि एक आरोपी को पुलिस रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा रही है।
जांच एजेंसी ने अब तक 16 स्थानों पर गहन छापेमारी की है और कई स्थानों से सीसीटीवी व अन्य वीडियो फुटेज भी एकत्र किए गए हैं।
संपत्तियों के दस्तावेज, वाहन और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त
छापेमारी के दौरान जांच टीम को कई महत्वपूर्ण दस्तावेज मिले हैं, जिनमें संपत्तियों की खरीद से जुड़े कागजात भी शामिल हैं। इसके अलावा 25 से अधिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जैसे मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य डिजिटल डिवाइस जब्त किए गए हैं, जिनकी साइबर फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है।
इसके साथ ही अपराध से अर्जित धन से खरीदे जाने के संदेह में 6 लग्जरी वाहन भी जब्त किए गए हैं, जिनमें
3 फॉर्च्यूनर
2 इनोवा
1 मर्सिडीज
शामिल हैं।
जांच के दौरान 10 ऐसी संपत्तियों की भी पहचान की गई है जिन्हें कथित तौर पर इस घोटाले की रकम से खरीदा गया बताया जा रहा है।
फर्जी डेबिट मेमो और नकली बैंक स्टेटमेंट से हुआ घोटाला
जांच में यह भी सामने आया है कि बैंक रिकॉर्ड में फर्जी डेबिट मेमो तैयार किए गए या फिर बिना वैध डेबिट मेमो और चेक के ही धनराशि ट्रांसफर की गई। इसके अलावा नकली बैंक स्टेटमेंट तैयार कर खातों से रकम निकालकर विभिन्न खातों में भेजी गई।
ये खाते सीधे या परोक्ष रूप से आरोपियों और उनके परिजनों से जुड़े बताए जा रहे हैं। जांच एजेंसी बैंकों और सरकारी विभागों से प्राप्त रिकॉर्ड का गहन विश्लेषण कर रही है और अधिकृत तथा अनधिकृत लेन-देन की पहचान की जा रही है ताकि पूरे फंड फ्लो का पता लगाया जा सके।
कई सरकारी अधिकारियों की संलिप्तता के संकेत
अब तक की जांच में 8 सरकारी विभागों में अनधिकृत लेन-देन सामने आए हैं और इनकी पहचान की जा चुकी है। पिछले एक वर्ष के लेन-देन का विस्तृत ऑडिट किया जा रहा है, जो अंतिम चरण में है।
जांच एजेंसी के अनुसार कई सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ-साथ निजी व्यक्तियों की संलिप्तता के संकेत मिले हैं। पुष्टि होने के बाद उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
जांच जारी, और बड़े खुलासों की संभावना
राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के अनुसार इस मामले में विभिन्न केंद्रीय और राज्य एजेंसियों के साथ समन्वय कर जांच आगे बढ़ाई जा रही है। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है और तकनीकी तथा वैज्ञानिक तरीकों से पूरे नेटवर्क की पड़ताल की जा रही है।
अधिकारियों का कहना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ इस घोटाले में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना है।











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