बाबूगिरी ब्यूरो
चंडीगढ़, 11 अप्रैल 2026: चंडीगढ़ में आयुष शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। सेक्टर-48 में 4.8 एकड़ भूमि एक सरकारी आयुष संस्थान (सेंटर ऑफ एक्सीलेंस) की स्थापना के लिए आवंटित की गई है। इस फैसले से शहर में आयुर्वेद और होम्योपैथी जैसी पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को नई पहचान मिलने की उम्मीद है।
यह जानकारी भारतीय जनता पार्टी, चंडीगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष जितेन्द्र पाल मल्होत्रा ने दी। उन्होंने बताया कि यह परियोजना पार्टी के प्रयासों, केंद्र सरकार के मार्गदर्शन और चंडीगढ़ प्रशासन के सहयोग से साकार हुई है, जो लंबे समय से लंबित थी।
उन्होंने कहा कि यह संस्थान विशेष रूप से आयुर्वेद और होम्योपैथी चिकित्सा पद्धतियों के विकास, शिक्षा और अनुसंधान को बढ़ावा देगा। साथ ही आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं के साथ इन पारंपरिक पद्धतियों का समन्वय भी सुनिश्चित किया जाएगा।
मल्होत्रा ने इसे नरेंद्र मोदी के उस विजन का हिस्सा बताया, जिसमें पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि आयुष मंत्रालय द्वारा देशभर में आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी के विस्तार के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं और यह संस्थान उसी दिशा में एक अहम पहल है।
प्रस्तावित संस्थान में विद्यार्थियों को न्यूनतम सरकारी शुल्क पर आयुष शिक्षा उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों को लाभ मिलेगा। इसके अलावा यहां अत्याधुनिक अनुसंधान सुविधाएं, प्रशिक्षण केंद्र, ओपीडी सेवाएं और जन-जागरूकता कार्यक्रम भी संचालित किए जाएंगे।
उन्होंने बताया कि इस परियोजना का शिलान्यास जल्द ही केंद्र सरकार के किसी वरिष्ठ मंत्री द्वारा किया जा सकता है। यह संस्थान चंडीगढ़ को आयुर्वेद और होम्योपैथी शिक्षा व अनुसंधान के एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
मल्होत्रा ने विश्वास जताया कि इस पहल से युवाओं के लिए नए शैक्षणिक अवसर खुलेंगे, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और स्वास्थ्य क्षेत्र में चंडीगढ़ की पहचान और मजबूत होगी।











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