वित्त विभाग की बिना अनुमति खोले गए खातों पर सख्ती, सीबीआई जांच की भी तैयारी—अधिकारियों में मचा हड़कंप
बाबूगिरी ब्यूरो
चंडीगढ़, 2 अप्रैल 2026: हरियाणा सरकार प्राइवेट बैंकों में सरकारी धन के संभावित हेरफेर को लेकर पूरी तरह सतर्क हो गई है। वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) ने राज्य के सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों और अधीनस्थ संस्थाओं से उनके बैंक खातों और फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) की विस्तृत जानकारी तत्काल प्रभाव से मांगी है।
इस संबंध में 1 अप्रैल 2026 को जारी एक ‘मोस्ट अर्जेंट’ पत्र में साफ तौर पर निर्देश दिए गए हैं कि सभी विभाग अपने और अपने अधीन आने वाली संस्थाओं—जैसे नगर निगम पंचकूला, पुलिस हाउसिंग कॉरपोरेशन, बोर्ड, निगम, सोसाइटी और अन्य स्वायत्त निकाय—के सभी बैंक खातों का पूरा ब्योरा निर्धारित फॉर्मेट में भेजें।
बिना अनुमति खुले खातों पर सख्त नजर
वित्त विभाग को मिली शुरुआती जानकारी में सामने आया है कि कई विभागों और फील्ड कार्यालयों ने वित्त विभाग की अनुमति के बिना ही प्राइवेट बैंकों में खाते खोल रखे हैं। इन खातों में सरकारी धन जमा किया गया है, जिससे नियमों के उल्लंघन की आशंका जताई जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, कुछ मामलों में मोटे कमीशन के लालच में अधिकारियों द्वारा सरकारी फंड को प्राइवेट बैंकों में शिफ्ट किए जाने की भी आशंका है। इसी कारण पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए सरकार ने सभी खातों का ऑडिट कराने का फैसला लिया है।
तय फॉर्मेट में देनी होगी पूरी जानकारी
जारी आदेश के अनुसार, विभागों को अपने सभी बैंक खातों की जानकारी—खाता संख्या, बैंक का नाम, शाखा, बैलेंस, खाता खोलने की तारीख, अनुमति की स्थिति और उद्देश्य—MS Excel फॉर्मेट में देनी होगी।
इसके अलावा, फिक्स्ड डिपॉजिट से जुड़ी जानकारी जैसे—ब्याज दर, परिपक्वता अवधि और कॉल करने की स्थिति भी अनिवार्य रूप से देनी होगी।
समयसीमा तय, देरी पर कार्रवाई संभव
वित्त विभाग ने स्पष्ट किया है कि 20 मार्च 2026 तक की अद्यतन जानकारी 3 दिनों के भीतर यानी 5 अप्रैल 2026 तक हर हाल में जमा करानी होगी। देरी या अधूरी जानकारी देने वाले विभागों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
सीबीआई जांच की ओर बढ़ रहा मामला
मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को भी मार्क कर दिया गया है। इससे संकेत मिलते हैं कि यदि अनियमितताएं सामने आती हैं तो जांच एजेंसियां सीधे तौर पर इसमें हस्तक्षेप कर सकती हैं।
विभागों में मचा हड़कंप
इस आदेश के बाद राज्य के विभिन्न विभागों और निगमों में हड़कंप की स्थिति है। कई विभाग पुराने खातों और लेन-देन के रिकॉर्ड को खंगालने में जुट गए हैं, ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी सामने आने से पहले स्थिति स्पष्ट की जा सके।
सरकार का फोकस: पारदर्शिता और नियंत्रण
वित्त विभाग का यह कदम सरकारी धन के उपयोग में पारदर्शिता लाने और वित्तीय अनुशासन को मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि सभी सरकारी लेन-देन तय नियमों और स्वीकृत प्रक्रियाओं के तहत ही हों।
अगर जांच में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या अनियमितता सामने आती है, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई तय मानी जा रही है।











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