बेटियों की सुरक्षा से समझौता नहीं, अपराधियों के लिए जेल ही एकमात्र ठिकाना: डीसीपी सृष्टि गुप्ता
बाबूगिरी ब्यूरो
पंचकूला/ 20 अप्रैल: -पंचकूला की फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश कु अदालत ने सोमवार की हरियाणा के पंचकूला में महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध होने वाले अपराधों पर एक बार फिर कड़ा प्रहार किया है। पंचकूला की फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश मनीष दुआ की अदालत ने वर्ष 2021 के एक पॉक्सो मामले में ऐतिहासिक निर्णय सुनाते हुए आरोपी को 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा दी है। अदालत ने दोषी पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है, जिसे अदा न करने की सूरत में सजा की अवधि बढ़ाई जाएगी। अदालत ने आरोपी को पॉक्सो एक्ट की धारा 4(2) और भारतीय दंड संहिता की धारा 506 के तहत दोषी पाते हुए यह कड़ी सजा सुनाई है। यह फैसला समाज में एक कड़ा संदेश देता है कि मासूमों की अस्मत से खिलवाड़ करने वालों के लिए कानून में कोई जगह नहीं है।
यह मामला 13 दिसंबर 2021 को तब प्रकाश में आया था जब पीड़िता की मां ने पंचकूला महिला थाना में न्याय की गुहार लगाई थी। शिकायत में बताया गया था कि 12 दिसंबर को एक परिचित व्यक्ति उनकी 14 वर्षीय बेटी को किसी रिश्तेदार से मिलवाने के बहाने पंचकूला के ही एक सुनसान स्थान पर ले गया और वहां उसके साथ दुष्कर्म किया। शिकायत के आधार पर तुरंत महिला थाना में मामला दर्ज कर जांच प्रक्रिया शुरु की गई। उस वक्त पंचकूला के महिला थाना में तैनात महिला पीएसआई प्रिया के नेतृत्व में पुलिस ने तत्परता दिखाई और मूल रूप से उत्तर प्रदेश निवासी आरोपी को 14 अप्रैल को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे पहुँचाया।
डीसीपी पंचकूला सृष्टि गुप्ता ने कहा: बेटियों की सुरक्षा हमारे लिए केवल एक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि एक अटूट संकल्प है जिससे किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जा सकता। अपराधियों के लिए जेल ही एकमात्र ठिकाना है। इस केस की जांच के दौरान हमने हर वैज्ञानिक और तकनीकी पहलू को बारीकी से परखा ताकि न्याय की राह में कोई भी कमी न रह जाए। आज का यह फैसला पुलिस की कड़ी मेहनत और न्यायपालिका की संवेदनशीलता का प्रमाण है। पंचकूला पुलिस महिलाओं और बच्चों के लिए एक सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने हेतु पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
इस बड़े फैसले पर पंचकूला पुलिस कमिश्नर (एडीजीपी) शिवास कविराज ने भी कानून-व्यवस्था के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा: समाज में डर अपराधियों के मन में होना चाहिए, आम जनता के मन में नहीं। पॉक्सो एक्ट के तहत दी गई यह सजा उन लोगों के लिए एक सख्त चेतावनी है जो मासूमों को अपना शिकार बनाने की सोचते हैं। पंचकूला पुलिस की प्रभावी पैरवी और त्वरित जांच ने यह सुनिश्चित किया कि न्याय मिलने में देरी न हो। हम जिले में महिलाओं के लिए एक सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने हेतु जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रहे हैं।












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