मज़दूरों के हितों की सुरक्षा राज्य सरकार की पहली प्राथमिकता: लाल चंद कटारूचक
चंडीगढ़, 7 जनवरी। वन एवं वन्यजीव सुरक्षा विभाग ने पिछले सात महीनों के दौरान 1000 से अधिक कर्मचारियों की सेवाएँ नियमित की हैं। इसके अलावा वर्ष 2023 में बनाई गई नीति के तहत 10 वर्ष की सेवा पूरी कर चुके 519 वरिष्ठ कर्मचारियों—जो आयु और शैक्षणिक योग्यता की शर्तें पूरी नहीं करते—को नियमित करने का प्रस्ताव वित्त, कार्मिक और कानूनी सलाहकार विभाग को भेजा गया है।
यह जानकारी आज वन एवं वन्यजीव सुरक्षा मंत्री श्री लाल चंद कटारूचक ने वन परिसर में फॉरेस्ट वर्कर्स यूनियन के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक के दौरान दी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री भगवंत सिंह मान के दूरदर्शी नेतृत्व से प्रेरित होकर वन विभाग अपने कर्मचारियों को अधिकतम लाभ पहुँचाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
बैठक के दौरान यूनियन प्रतिनिधियों ने 30 जुलाई को नियुक्ति पत्र प्राप्त करने वाले कर्मचारियों के वेतन जारी न होने का मुद्दा उठाया। इस पर विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने मंत्री को अवगत कराया कि संबंधित कर्मचारियों की एकीकृत मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली (आईएसआरएमएस) की आईडी अपडेट कर दी गई हैं और शीघ्र ही उनका वेतन जारी कर दिया जाएगा। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि भुगतान समय पर सुनिश्चित किया जाए, ताकि कर्मचारियों को किसी भी प्रकार की वित्तीय कठिनाई का सामना न करना पड़े।
मंत्री लाल चंद कटारूचक ने यूनियन की अन्य मांगों को भी गंभीरता और धैर्यपूर्वक सुना तथा आश्वासन दिया कि विभागीय कर्मचारियों के हितों की रक्षा करना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है, क्योंकि कर्मचारी ही किसी भी विभाग की रीढ़ होते हैं।
इस अवसर पर वन एवं वन्यजीव सुरक्षा विभाग के सचिव श्री प्रियंक भारती, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन बल प्रमुख) धर्मेंद्र शर्मा तथा मुख्य वन संरक्षक (मैदानी क्षेत्र) सुश्री निधि श्रीवास्तव भी उपस्थित रहे।










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