बजट सत्र से पहले विधायकों, सांसदों, मंत्रियों और मुख्यमंत्री को सौंपा जाएगा मांग पत्र
एनपीएस में गारंटी पेंशन के नाम पर नई कमिटी, कर्मचारियों की ओपीएस मांग को कमजोर करने का प्रयास
यूपीएस को नकार चुके कर्मचारी, पुरानी पेंशन पर अडिग
चंडीगढ़/हरियाणा, 14 जनवरी 2026:
केंद्र सरकार द्वारा एनपीएस (नेशनल पेंशन सिस्टम) में गारंटी वाली पेंशन देने के उद्देश्य से पेंशन कोष विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (PFRDA) के तहत एक उच्च स्तरीय समिति के गठन की घोषणा के बाद कर्मचारी संगठनों में असंतोष और तेज हो गया है। पेंशन बहाली संघर्ष समिति ने इसे कर्मचारियों की पुरानी पेंशन योजना (OPS) की मांग को कमजोर करने का प्रयास करार दिया है।
पीएफआरडीए द्वारा गठित 15 सदस्यीय समिति की अध्यक्षता दिवाला एवं शोधन अक्षमता बोर्ड (IBBI) के पूर्व अध्यक्ष डॉ. एम.एस. साहू करेंगे। यह समिति एनपीएस के अंतर्गत निश्चित पेंशन सुनिश्चित करने हेतु नियमों के विकास, बाजार आधारित गारंटी मॉडल, जोखिम प्रबंधन, परिचालन व्यवस्था, कानूनी निगरानी और अंशधारकों की सुरक्षा जैसे विषयों पर विचार करेगी।
हालांकि, इससे पहले केंद्र सरकार द्वारा घोषित यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) को भी देशभर के कर्मचारियों ने पूरी तरह नकार दिया है। कर्मचारियों का स्पष्ट कहना है कि एनपीएस या यूपीएस में किसी भी प्रकार का संशोधन उनकी सामाजिक सुरक्षा की मूल समस्या का समाधान नहीं कर सकता।
पेंशन बहाली संघर्ष समिति हरियाणा के प्रदेश अध्यक्ष विजेंद्र धारीवाल ने कहा कि बाजार आधारित किसी भी पेंशन प्रणाली में कर्मचारियों का भविष्य सुरक्षित नहीं है। सेवानिवृत्ति के बाद सम्मानजनक और सुरक्षित जीवन की गारंटी केवल पुरानी पेंशन योजना (OPS) ही दे सकती है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कमिटी गठन और नई-नई योजनाओं के जरिए कर्मचारियों को भ्रमित करने की नीति अब स्वीकार्य नहीं होगी। सरकार स्वयं यह मान चुकी है कि एनपीएस सामाजिक सुरक्षा देने में विफल रही है, तभी बार-बार उसमें बदलाव की बात की जा रही है।
विजेंद्र धारीवाल ने कहा कि एनपीएस/यूपीएस में सुनिश्चित पेंशन की बातें वास्तव में कर्मचारियों को वास्तविक सुरक्षा देने के लिए नहीं, बल्कि शेयर बाजार में निवेशित कर्मचारियों की राशि को बनाए रखने के उद्देश्य से की जा रही हैं। यह कर्मचारियों के भविष्य के साथ सीधा खिलवाड़ है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि पेंशन बहाली संघर्ष समिति बजट सत्र से पहले प्रदेश के सभी विधायकों, सांसदों, मंत्रियों एवं मुख्यमंत्री को मांग पत्र सौंपेगी। यदि इसके बावजूद भी सरकार ने पुरानी पेंशन योजना की बहाली को लेकर कोई ठोस और निर्णायक कदम नहीं उठाया, तो प्रदेशभर में बड़ा आंदोलन किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी।











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