April 6, 2026 12:13 am

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दिल्ली–एनसीआर के गाज़ीपुर मंडी मे अवैध घुसपैठ, सरकारी भूमि अतिक्रमण और प्रतिबंधित नेटवर्क — निर्णायक कार्रवाई की अनिवार्यता

दिल्ली उपराज्यपाल के आधिकारिक एप पर दी गई, स्थानीय नागरिकों द्वारा शिकायत

विशेष ग्राउंड रिपोर्ट | रविंद्र आर्य
दिल्ली–एनसीआर
गुजरात में अवैध धार्मिक अतिक्रमण और कट्टरपंथी नेटवर्क के विरुद्ध हालिया, कानूनसम्मत और सख़्त कार्रवाई ने देशभर में यह स्पष्ट संदेश दिया है कि राज्य की संप्रभुता, सार्वजनिक भूमि और आंतरिक सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। इसी पृष्ठभूमि में अब दिल्ली–एनसीआर, विशेषकर आनंद विहार सीमा, गाज़ीपुर मंडी और उससे जुड़े क्षेत्रों का कॉरिडोर गंभीर सवालों के घेरे में है—जहाँ अवैध घुसपैठ, सरकारी भूमि पर संगठित कब्ज़ा, नकली पहचान पत्र और प्रतिबंधित संगठनों से संभावित वैचारिक–लॉजिस्टिक संबंधों के आरोप लगातार सामने आ रहे हैं।

गाज़ीपुर डेयरी फ़ार्म: सरकारी भूमि पर संगठित अतिक्रमण का गढ़
स्थानीय निवासियों, ग्राउंड इनपुट्स और उपलब्ध शिकायतों के अनुसार गाज़ीपुर डेयरी फ़ार्म के सी, बी और डी ब्लॉकों में डी-यू-एस-आई-बी (DUSIB) की खाली पड़ी सरकारी भूमि पर भू-माफ़ियाओं द्वारा योजनाबद्ध ढंग से अतिक्रमण किया गया है। आरोप है कि झुग्गी–झोपड़ी की आड़ में तीन मंज़िला पक्के निर्माण खड़े कर दिए गए हैं।
विशेष रूप से बी-ब्लॉक, गली संख्या 6 में पावर हाउस के पीछे लगभग 15,000 वर्ग मीटर सरकारी भूमि पर अवैध डेयरियाँ संचालित की जा रही हैं। इन स्थानों को अलग-अलग समूहों को 40,000 से 50,000 रुपये मासिक किराये पर देकर प्रतिमाह करोड़ों रुपये की अवैध वसूली की जा रही है। यह न केवल सरकारी संपत्ति की खुली लूट है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा बन चुका है।

प्रशासनिक संरक्षण और पुलिस निष्क्रियता के आरोप

स्थानीय नागरिकों द्वारा उपराज्यपाल के आधिकारिक एप पर दी गई शिकायतों में आरोप लगाया गया है कि डी-यू-एस-आई-बी / DUSIB की भूमि से जुड़े कुछ अधिकारी— एक्शन/XEN तथा एई/AE स्तर तक—इन अतिक्रमणों को संरक्षण दे रहे हैं।
गाज़ीपुर पुलिस द्वारा वर्षों से ठोस कार्रवाई न होना, और शिकायतों के बावजूद केवल “झुग्गी रिपोर्ट” भेजकर मामला निपटाना, मिलीभगत की आशंका को और गहरा करता है।
श्मशान घाट के समीप पावर हाउस की लगभग 25 बीघा भूमि पर खुलेआम 100 से 150 झुग्गियाँ बस जाने के बावजूद प्रशासनिक चुप्पी कई गंभीर प्रश्न खड़े करती है।
जहाँ गाजीपुर में झुग्गियों ने 10×10 की जगह को, अब कब्जा रखी है 500-500 गज की जगह।
माननीय उपराज्यपाल दिल्ली को तत्काल कार्रवाई कर सरकारी ज़मीनों पर अतिक्रमण होने से रोकना चाहिए और दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड, दिल्ली विकास प्राधिकरण, लोक निर्माण विभाग, विशेष कार्य बल और नगर निगम को सभी अवैध कब्ज़े करने वाले भू-माफियाओं तथा गाज़ीपुर सम्बंधित अधिकारियो के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।

प्रतिबंध के बावजूद सक्रिय पीअफआई -सदृश नेटवर्क?
भारत सरकार द्वारा पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) पर प्रतिबंध के बाद भी, स्थानीय इनपुट्स के अनुसार उसके ओवर ग्राउंड वर्कर्स (OGW), स्लीपर-सेल पैटर्न और सहायक जमातों की गतिविधियाँ पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं।

धार्मिक पहचान की आड़ में:
दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड, दिल्ली विकास प्राधिकरण, लोक निर्माण विभाग और नगर निगम
DUSIB / DDA / MCD / मंडी भूमि पर कब्ज़ा कर
अस्थायी ढाँचों को “स्थायी धार्मिक संरचना” में बदलना
भीड़-राजनीति के ज़रिये प्रशासन पर दबाव
जैसे पैटर्न सामने आ रहे हैं, जो सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं।

अवैध मदरसे, मस्जिदें और गंभीर आरोप

गाज़ीपुर डेयरी फ़ार्म और उसके 2–3 किलोमीटर के दायरे में टीन-शेड से लेकर पक्के लिंटर तक के अनेक अवैध मदरसे और मस्जिदें बिना वैधानिक स्वीकृति संचालित होने के आरोप झेल रही हैं।
2 अबैध मदरसा है वहाँ तो गाय भैंस के बच्चों तक को काटा जाता रहा है। ये मस्जिद मदरसा जों रिलीजिस कमेटी उपराज्यपाल के आधीन आती है।
विनोद नगर मेट्रो डिपो के समीप झुग्गी क्षेत्र में दो अवैध मदरसे
बी-ब्लॉक, गली संख्या 3, बकरा मंडी के पास “जामिया 96” नामक कथित अवैध मस्जिद–मदरसा
इन संस्थानों पर बिना अनुमति बच्चों को धार्मिक कट्टरता की शिक्षा देने, अनैतिक गतिविधियों और दुर्व्यवहार जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। नार्थ ईस्ट, असम, पश्चिम बंगाल और अन्य सीमावर्ती राज्यों से डुप्लीकेट आधार कार्ड के माध्यम से आने-जाने वालों की गतिविधियाँ लंबे समय से संदेह के घेरे में हैं। जिसमें सबसे अधिक बांग्लादेशी, ओर रोहिंग्या समुदाय के लोगो की तब्लीकी जमाते गतिविधियों को देखा गया है। कश्मीरी व्यापारी एवं स्थानीय मुस्लिम यही से अप्रवासियों को दस्तावेज़ी विवाह (निकाह) के माध्यम से निजामुद्दीन मरकज ले जाकर भारतीय बनाने का प्रयास किया जाता रहा है।

नकली पहचान पत्र: राष्ट्रीय सुरक्षा पर सीधा आघात
गुजरात में कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में अवैध प्रवासियों के पास नकली भारतीय आधार कार्ड मिलने के बाद यह स्पष्ट हो गया कि पहचान तंत्र का दुरुपयोग किस स्तर तक हो रहा है। गाज़ीपुर मंडी और आनंद विहार क्षेत्र में भी:
नकली आधार, पैन, वोटर ID
एक ही पते पर दर्ज दर्जनों पहचान पत्र
संदिग्ध बायोमेट्रिक एंट्री
जैसे मामलों की फॉरेंसिक और फील्ड-जांच की आवश्यकता है। यह केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का प्रश्न है।

विदेशी हथियार, फायरिंग और संगठित अपराध की आशंका
एक वर्ष पूर्व इसी क्षेत्र में विदेशी हथियार से फायरिंग की घटना सामने आई थी। तत्कालीन एसएचओ निर्मल झा के कार्यकाल में लगभग 40 फीट की दूरी से चली गोली ने घर के लोहे के 2 दरवाजे की चादरों 10 मिमी प्लेट को भेदते हुए दीवार में 2–3 इंच तक छेद कर दिया था।
एफएसएल रिपोर्ट के अनुसार यह 7.5 मिमी कैलिबर की गोली थी—जो आमतौर पर आतंकवादी गतिविधियों में प्रयुक्त हथियारों से जुड़ी मानी जाती है।
हालिया दिल्ली विस्फोट के बाद स्थानीय लोगों ने कश्मीर व्यापारीयों का –गाज़ीपुर मार्ग पर रातभर चलने वाले ट्रकों के माध्यम से हथियार, नशीले या ज्वलनशील पदार्थों की तस्करी की आशंका भी जताई है।

अंतरराज्यीय–अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का संकेत
सूत्रों के अनुसार अवैध रूप से बसाए गए लोगों को पहले ही देश के 12 से अधिक राज्य से मुख्य शहरों में फैलाया जा चुका है। म्यांमार का नागरिक इब्राहिम, जो जम्मू की वर्मा कॉलोनी तक नेटवर्क खड़ा कर चुका था और हाल ही में कानपुर से पकड़ा गया, इस खतरे का प्रत्यक्ष उदाहरण है।
गुप्त सूचनाओं में यह भी सामने आया है कि महिलाओं, बच्चों और युवतियों को मजदूरी के नाम पर लाकर दस्तावेज़ी विवाह (निकाह) के माध्यम से भारतीय बनाने का प्रयास किया जाता है—जिसकी शुरुआत डुप्लीकेट आधार कार्ड से होती है।

आनंद विहार सीमा: अत्यंत संवेदनशील सुरक्षा क्षेत्र
आनंद विहार सीमा क्षेत्र—जहाँ करीब मे हिंडन एयरपोर्ट, पीएसी-44 कैंप, सीआरपीएफ कैंप, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, मेट्रो स्टेशन, मॉल और वीआईपी होटल स्थित हैं—अत्यंत संवेदनशील है।
बिना सत्यापन बसे अवैध अप्रवासी किसी भी देशविरोधी गतिविधि को अंजाम देकर रातों-रात गायब हो सकते हैं।

संविधान सर्वोपरि, कार्रवाई अनिवार्य
यह पूरा प्रकरण केवल अतिक्रमण या अवैध बसावट का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा, प्रशासनिक जवाबदेही और संवैधानिक व्यवस्था का है।
आस्था के नाम पर अवैध कब्ज़ा स्वीकार्य नहीं, और धर्म के नाम पर कानून से छूट नहीं मिल सकती।
यदि दिल्ली–एनसीआर में गुजरात मॉडल की तरह निष्पक्ष, कानूनसम्मत और चरणबद्ध कार्रवाई होती है, तो यह न केवल अतिक्रमण बल्कि कट्टरपंथी नेटवर्क के लिए भी निर्णायक झटका होगा।

ग्राउंड रिपोर्ट : रविंद्र आर्य
(वरिष्ठ खोजी पत्रकार एवं लेखक)

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Author: BabuGiri Hindi

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