April 5, 2026 6:41 pm

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तहसीलदार विक्रम सिंगला गिरफ्तारी मामला; पर्ल ग्रुप जमीन घोटाला: 18 एकड़ स्टे हटाकर रजिस्ट्री मामला गहराया, कई पटवारी व कानूनगो भी विजिलेंस का राडार पर

पहली रजिस्ट्री के 21 दिन बाद जमीन चार लोगों को बेची, अब पटवारी की भूमिका भी संदिग्ध

पंचकूला | रायपुररानी | 2 फरवरी। रायपुररानी के शाहपुर गांव में पर्ल ग्रुप से जुड़ी करीब 18 एकड़ जमीन से कथित तौर पर गलत तरीके से स्टे हटाकर रजिस्ट्री करने के मामले में जांच लगातार नए खुलासे कर रही है। तहसीलदार विक्रम सिंगला की गिरफ्तारी के बाद अब इस पूरे घोटाले में एक पटवारी की भूमिका भी गंभीर रूप से संदिग्ध मानी जा रही है, जिससे मामला और ज्यादा गहराता जा रहा है। मामले में कई पटवारी व कानूनगो भी विजिलेंस की राडार पर है। राजस्व विभाग में हड़कंप मचा हुआ है
जांच में सामने आया है कि 16 अक्टूबर 2025 को जिस व्यक्ति ने यह जमीन खरीदी थी, उसने महज 21 दिन बाद 6 नवंबर 2025 को पूरी जमीन चार अलग-अलग लोगों को बेच दी। पंचकूला निवासी विशाल, संजय सिंगला, राजन गोयल और संगरूर निवासी मुनीष को 4.42-4.42 एकड़ जमीन की रजिस्ट्री की गई। अब विजिलेंस ब्यूरो इन सभी खरीदारों से भी पूछताछ की तैयारी में है।
सूत्रों के अनुसार, पहली रजिस्ट्री कराने वाला व्यक्ति हरियाणा के राजस्व विभाग के एक अधिकारी का करीबी बताया जा रहा है। विजिलेंस इस बात की जांच कर रही है कि इस पूरे खेल में राजस्व विभाग के कौन-कौन से अधिकारी और कर्मचारी शामिल रहे।

पटवारी की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल
विजिलेंस जांच में यह भी सामने आया है कि जमीन के रिकॉर्ड में बदलाव, जमाबंदी, इंतकाल (म्यूटेशन) और अन्य राजस्व दस्तावेजों की प्रक्रिया में एक पटवारी की अहम भूमिका रही है। जांच एजेंसी का मानना है कि बिना पटवारी की मिलीभगत के इतनी बड़ी जमीन का फर्जी और धोखाधड़ीपूर्ण लेन–देन संभव ही नहीं था।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह पटवारी पहले भी रिश्वतखोरी के एक मामले में पकड़ा जा चुका है। उस समय उसके खिलाफ कार्रवाई भी हुई थी, लेकिन कथित तौर पर “सेटिंग” के जरिए उसने दोबारा रायपुररानी जैसे संवेदनशील क्षेत्र में पोस्टिंग हासिल कर ली। अब विजिलेंस यह भी जांच कर रही है कि किन अधिकारियों या प्रभावशाली लोगों के संरक्षण में उसे दोबारा तैनाती मिली।

26 सितंबर से शुरू हुई साजिश की पूरी टाइमलाइन
26 सितंबर 2025 को बलदेव कौर ने पंचकूला एसडीएम को पत्र लिखकर बताया कि रायपुररानी के शाहपुर स्थित जमीन उनके बेटे कुलबीर सिंह के नाम थी। बेटे की मृत्यु के बाद वह उसकी कानूनी वारिस हैं। पत्र में जमीन पर लगे स्टे को हटाने और रिकॉर्ड दुरुस्त करने की मांग की गई।
उसी दिन एसडीएम ने नियम अनुसार कार्रवाई के निर्देश देते हुए पत्र रायपुररानी तहसीलदार को भेज दिया। शिकायत के महज 19 दिनों के भीतर, 15 अक्टूबर 2025 तक तहसीलदार, कानूनगो और पटवारी ने तेजी दिखाते हुए जमीन से स्टे हटाकर रिकॉर्ड में बदलाव कर दिया। 16 अक्टूबर को जमीन महिला के नाम दर्ज कर उसे नवीन नामक व्यक्ति को बेच दिया गया।

नवंबर में खुली परतें, दिसंबर में बढ़ी हलचल
जमीन की रजिस्ट्री की जानकारी नवंबर 2025 में ही उच्च अधिकारियों तक पहुंच गई थी। इसके बाद 4 दिसंबर 2025 को पर्ल ग्रुप की एक अन्य जमीन के मालिक, मोहाली निवासी गगनप्रीत सिंह ने पंचकूला एसडीएम को पत्र लिखकर स्टे हटाने और रिकॉर्ड दुरुस्त करने का आवेदन दिया। इससे प्रशासन को पूरे मामले में गड़बड़ी की आशंका और गहरी हो गई।
पंचकूला एसडीएम ने रायपुररानी तहसीलदार से स्टे हटाने की प्रक्रिया को लेकर जवाब तलब किया। तहसीलदार, कानूनगो और पटवारी से स्पष्टीकरण मांगा गया। जनवरी में दिए गए जवाब में तहसीलदार ने नियमों के अनुसार कार्रवाई का दावा किया, लेकिन एसडीएम ने मामले की गंभीरता को देखते हुए डीसी पंचकूला, पुलिस कमिश्नर, विजिलेंस, मुख्य सचिव सहित वरिष्ठ अधिकारियों को पूरी रिपोर्ट भेज दी।

30 जनवरी को केस, 31 को गिरफ्तारी
30 जनवरी 2026 की शाम विजिलेंस कार्रवाई के लिए मुख्य सचिव से अनुमति ली गई। उसी दिन केस दर्ज किया गया और 31 जनवरी की तड़के करीब 4 बजे विजिलेंस टीम ने चंडीगढ़ स्थित आवास से रायपुररानी तहसीलदार विक्रम सिंगला को गिरफ्तार कर लिया। विजिलेंस टीम ने करीब 5 घंटे तक दस्तावेजों की जांच और पूछताछ की। आरोपी तहसीलदार इस समय तीन दिन की पुलिस रिमांड पर है।

तहसीलदार विक्रम: विवादों का पुराना इतिहास
गिरफ्तार तहसीलदार विक्रम सिंगला का नाम इससे पहले भी कई विवादित मामलों में सामने आ चुका है।
कालका में कथित गलत रजिस्ट्री को लेकर पहले से विजिलेंस जांच चल रही है।
पिंजौर में एक महिला को कागजों में मृत दिखाकर जमीन की रजिस्ट्री कराने के मामले में एफआईआर दर्ज है।
सेवा काल के दौरान अम्बाला और पंचकूला जिलों की तहसीलों में उसकी बार-बार पोस्टिंग को लेकर भी विभागीय स्तर पर सवाल उठते रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक, आरोपी पर ट्राइसिटी (चंडीगढ़–पंचकूला–मोहाली) में कई करोड़ रुपये की बेनामी संपत्ति का मालिक होने के भी गंभीर आरोप हैं, जिनकी अब जांच एजेंसियां पड़ताल कर सकती हैं।

नेटवर्क की आशंका, जांच का दायरा बढ़ा
विजिलेंस एवं एंटी करप्शन ब्यूरो (SV&ACB) को आशंका है कि यह मामला केवल तहसीलदार और पटवारी तक सीमित नहीं है, बल्कि एक संगठित नेटवर्क इसके पीछे सक्रिय था। जांच के दायरे में अब अन्य राजस्व कर्मचारी और निजी व्यक्ति भी आ सकते हैं।
विजिलेंस अधिकारियों का कहना है कि जांच में यदि आरोप सही पाए गए तो संबंधित पटवारी समेत सभी दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस घोटाले ने एक बार फिर राजस्व विभाग में भ्रष्टाचार और प्रशासनिक संरक्षण पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

BabuGiri Hindi
Author: BabuGiri Hindi

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