लाइसेंस के बिना चल रहीं ‘किसान मंडियां’, रोजाना सैकड़ों रुपये की अवैध वसूली का आरोप
पंचकूला: पंचकूला में अलग-अलग स्थानों पर लगने वाली अस्थायी सब्जी मंडियों में स्ट्रीट वेंडरों के शोषण का गंभीर मामला सामने आया है। नियमों को दरकिनार कर “किसान मंडी” के नाम पर चल रही इन मंडियों में न तो वास्तविक किसान मौजूद हैं और न ही किसी भी वेंडर का विधिवत पंजीकरण किया गया है। स्ट्रीट वेंडर एक्ट के तहत जहां हर विक्रेता का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है, वहीं हकीकत यह है कि एक भी वेंडर के पास वैध लाइसेंस नहीं है।
स्थानीय वेंडरों का आरोप है कि इन मंडियों में एक संगठित गिरोह सक्रिय है, जो गरीब रेहड़ी-फड़ी वालों से रोजाना के हिसाब से अवैध वसूली कर रहा है। वेंडरों के मुताबिक छतरी लगाने, टेबल/फट्टा, लाइट, पॉलीथिन और अन्य सुविधाओं के नाम पर बाजार दर से कहीं ज्यादा पैसे वसूले जाते हैं। जो विक्रेता यह सामान गिरोह से नहीं लेते, उन्हें बैठने नहीं दिया जाता या तरह-तरह से परेशान किया जाता है।
रोजाना 500 रुपये तक वसूली का दावा
पीड़ित वेंडरों का कहना है कि एक-एक विक्रेता से प्रतिदिन 300 से 500 रुपये तक वसूले जा रहे हैं। जबकि स्ट्रीट वेंडर एक्ट के प्रावधानों के अनुसार केवल रजिस्टर्ड स्ट्रीट वेंडरों से ही सरकार द्वारा निर्धारित मासिक शुल्क ही लिया जा सकता है। दैनिक वसूली पूरी तरह अवैध है।
लाइसेंस प्रक्रिया में बाधा, कर्मचारियों को भगाने का आरोप
वेंडरों ने बताया कि वे कई बार नगर निगम से लाइसेंस बनवाने का आग्रह कर चुके हैं। जब-जब निगम कर्मचारी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शुरू करने मंडी में पहुंचे, दबंग तत्वों ने उन्हें भगा दिया। हाल ही में भी ऐसा ही मामला सामने आया, जब कर्मचारियों को लाइसेंस बनाने से रोक दिया गया और वेंडरों को दस्तावेज जमा करने तक नहीं दिए गए। लाइसेंस बनवाने की कोशिश करने वाले कुछ विक्रेताओं को कथित तौर पर धमकाया गया कि अगली मंडी में जगह नहीं मिलेगी।
राजनीतिक संरक्षण का आरोप, कार्रवाई ठप
पीड़ितों का आरोप है कि कई बार लिखित शिकायतें देने के बावजूद राजनीतिक संरक्षण के चलते अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी। डर और दबाव के बीच वेंडर अब खुलकर सामने आने लगे हैं और मांग कर रहे हैं कि कानून के तहत उनका पंजीकरण किया जाए।
नगर निगम से सीधी मांग
वेंडरों ने नगर निगम पंचकूला के आयुक्त से मांग की है कि वे स्वयं मामले का संज्ञान लें, अवैध वसूली करने वालों पर सख्त कार्रवाई करें और सभी पात्र स्ट्रीट वेंडरों का तत्काल रजिस्ट्रेशन सुनिश्चित कराएं। उनकी मांग है कि उन्हें वैध पहचान, तय शुल्क प्रणाली और मूलभूत सुविधाएं—जैसे रोशनी, स्वच्छता और सुरक्षित बैठने की जगह—मुहैया कराई जाएं।
समय रहते कार्रवाई जरूरी
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए तो यह अवैध वसूली का नेटवर्क और फैल सकता है, जिसका सबसे बड़ा खामियाजा गरीब स्ट्रीट वेंडरों को भुगतना पड़ेगा। कानून के पालन और पारदर्शी व्यवस्था से ही वेंडरों का शोषण रोका जा सकता है।










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