चंडीगढ़/देहरादून: टेबल टेनिस फेडरेशन ऑफ इंडिया (TTFI) द्वारा 87वीं इंटर-स्टेट जूनियर एवं यूथ नेशनल टेबल टेनिस चैंपियनशिप 2025 की तिथियों की घोषणा के बाद खिलाड़ियों, अभिभावकों और कोचों में गहरी चिंता देखने को मिल रही है। यह प्रतिष्ठित राष्ट्रीय प्रतियोगिता देहरादून, उत्तराखंड में 22 फरवरी से 2 मार्च 2026 तक आयोजित की जानी है।
घोषित कार्यक्रम के अनुसार, यह चैंपियनशिप सीधे तौर पर कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं से टकरा रही है, जिन्हें केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) द्वारा 17 फरवरी 2026 से प्रारंभ किया जा रहा है। इस टकराव ने विशेष रूप से जूनियर (U-17) और यूथ (U-19) वर्ग के खिलाड़ियों के सामने गंभीर दुविधा खड़ी कर दी है।
खिलाड़ियों के सामने ‘करियर बनाम परीक्षा’ की चुनौती
जूनियर और यूथ वर्ग के अधिकांश खिलाड़ी वही छात्र हैं जो इसी सत्र में CBSE बोर्ड परीक्षाओं में शामिल हो रहे हैं। इन खिलाड़ियों ने वर्ष 2025 में आयोजित चयन प्रतियोगिताओं के माध्यम से अपनी-अपनी राज्य टीमों में स्थान बनाया था और बीते कई महीनों से राष्ट्रीय चैंपियनशिप की तैयारी कर रहे थे।
अब स्थिति यह बन गई है कि खिलाड़ियों को यह कठिन निर्णय लेना पड़ सकता है कि वे—
राष्ट्रीय स्तर पर अपने राज्य का प्रतिनिधित्व करें, या
अपनी अनिवार्य बोर्ड परीक्षाओं में शामिल हों।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति खिलाड़ियों के मानसिक दबाव को बढ़ा सकती है और उनके शैक्षणिक व खेल—दोनों करियर पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है।
समय-निर्धारण पर उठे सवाल
पर्यवेक्षकों और खेल प्रशासकों का कहना है कि CBSE ने बोर्ड परीक्षाओं का कार्यक्रम काफी पहले जारी कर दिया था, जबकि TTFI द्वारा चैंपियनशिप की तिथियों की घोषणा अपेक्षाकृत देर से की गई। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2019 और 2024 में यह राष्ट्रीय प्रतियोगिता जनवरी माह में आयोजित की गई थी, जिससे छात्रों को किसी प्रकार की शैक्षणिक बाधा का सामना नहीं करना पड़ा था।
इस वर्ष तिथियों में हुए बदलाव ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं और योजना प्रक्रिया पर पुनर्विचार की मांग तेज हो गई है।
तिथियों में बदलाव की मांग
अभिभावकों, कोचों और राज्य संघों ने TTFI एवं संबंधित प्राधिकरणों से अपील की है कि खिलाड़ियों के हित को प्राथमिकता देते हुए तिथियों पर पुनर्विचार किया जाए। सुझाव दिया गया है कि—
प्रतियोगिता 15 मार्च 2026 के बाद, या
अप्रैल 2026 में आयोजित की जाए,
ताकि छात्र अपनी बोर्ड परीक्षाएं पूरी कर बिना किसी तनाव के राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग ले सकें।
भविष्य की दिशा
खेल विशेषज्ञों का कहना है कि शिक्षा और खेल—दोनों का संतुलन बनाए रखना खिलाड़ियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए अनिवार्य है। ऐसे में राष्ट्रीय महासंघों से यह अपेक्षा की जा रही है कि वे कैलेंडर तय करते समय शैक्षणिक कार्यक्रमों को ध्यान में रखें, ताकि प्रतिभाशाली खिलाड़ी किसी मजबूरी में अपने सपनों से समझौता न करें।











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