April 5, 2026 2:01 pm

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CHANDIGARH: मेयर की प्रस्तुति पर सवाल, नगर निगम बजट में पारदर्शिता की मांग— आर. के. गर्ग

चंडीगढ़, 20 फरवरी। चंडीगढ़ नगर निगम के ताज़ा बजट को लेकर शहर की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता आर. के. गर्ग ने बजट प्रक्रिया और आंकड़ों को लेकर गंभीर सवाल उठाते हुए प्रशासन से पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की है। उनका कहना है कि बजट प्रस्तुति में दिखावे पर अधिक और तथ्यों पर कम ध्यान दिया गया।

गर्ग ने कहा कि मेयर Saurabh Joshi ने केंद्रीय वित्त मंत्री की शैली में बैग लेकर बजट पेश किया और पोडियम का उपयोग किया, लेकिन प्रस्तुति के दौरान पारदर्शिता के मूल तत्वों की अनदेखी की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि न तो बजट की हार्ड कॉपी पार्षदों या मीडिया को उपलब्ध कराई गई, न ही कोई विस्तृत सार्वजनिक सर्वे साझा किया गया और न ही नगर निगम की वेबसाइट पर कोई समर्पित ऑनलाइन बजट पोर्टल जारी किया गया।

तुलनात्मक आंकड़ों का अभाव

आर. के. गर्ग ने कहा कि किसी भी बजट की गंभीरता और विश्वसनीयता उसके तुलनात्मक विश्लेषण से तय होती है। पिछले वर्ष के बजट और वर्तमान प्रस्तावित बजट के बीच आय-व्यय का तुलनात्मक विवरण पेश नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि यदि नागरिकों को यह जानकारी नहीं होगी कि पिछले वर्ष कितनी राशि स्वीकृत हुई, कितनी खर्च हुई और कितनी शेष रही, तो वर्तमान बजट का मूल्यांकन अधूरा रहेगा।

गर्ग ने याद दिलाया कि पिछले वर्ष 2100 करोड़ रुपये से अधिक का बजट प्रस्तावित किया गया था। ऐसे में यह जानना आवश्यक है कि वास्तविक आय-व्यय का आंकड़ा क्या रहा और किन मदों में कटौती या वृद्धि की गई।

आय और व्यय में अंतर पर सवाल

नगर निगम द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार कुल प्रस्तावित बजट 1712 करोड़ रुपये दर्शाया गया है, जबकि अनुमानित प्राप्ति 1726 करोड़ रुपये बताई गई है। गर्ग ने कहा कि यदि अनुमानित प्राप्ति बजट से अधिक है, तो यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि अतिरिक्त संसाधन किन स्रोतों से आएंगे और क्या वे सुनिश्चित हैं या केवल अनुमानित हैं।

उन्होंने कहा कि कैपिटल बजट 610 करोड़ रुपये रखा गया है, जबकि Chandigarh Administration से अपेक्षित राशि 606 करोड़ रुपये बताई जा रही है। इस 4 करोड़ रुपये के अंतर का भी स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है।

गर्ग के अनुसार, प्रॉपर्टी टैक्स के संदर्भ में यूटी से 850 करोड़ रुपये का लक्ष्य बताया गया था, जबकि वास्तविक आय 461 करोड़ रुपये ही रही। इस प्रकार कुल आय लगभग 1311 करोड़ रुपये बनती है। यदि बजट 1712 करोड़ रुपये का है, तो शेष 401 करोड़ रुपये की पूर्ति किस प्रकार होगी, यह स्पष्ट नहीं किया गया है।

“चुनावी बजट” का आरोप

आर. के. गर्ग ने चेतावनी दी कि यदि आय के स्रोत स्पष्ट नहीं किए गए और संभावित वित्तीय अंतर की पूर्ति की ठोस योजना सामने नहीं आई, तो यह बजट एक “चुनावी बजट” के रूप में देखा जाएगा। उन्होंने कहा कि बजट का उद्देश्य केवल घोषणाएं करना नहीं, बल्कि वित्तीय अनुशासन और यथार्थवादी योजना प्रस्तुत करना होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ जैसे नियोजित और संसाधन-संपन्न शहर में वित्तीय पारदर्शिता सर्वोपरि होनी चाहिए। नगर निगम को चाहिए कि वह नागरिकों के सामने आय-व्यय का विस्तृत सार्वजनिक खुलासा करे, संभावित 401 करोड़ रुपये के अंतर की स्पष्ट रणनीति बताए और पिछले तथा वर्तमान बजट का तुलनात्मक श्वेतपत्र जारी करे।

प्रशासन से जवाब की प्रतीक्षा

शहर के राजनीतिक हलकों में इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने भी बजट प्रस्तुति की शैली और आंकड़ों की स्पष्टता पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। अब निगाहें नगर निगम प्रशासन और मेयर कार्यालय की ओर हैं कि वे इन आरोपों पर क्या स्पष्टीकरण देते हैं।

गर्ग ने अंत में कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में बजट केवल एक औपचारिक दस्तावेज नहीं, बल्कि जनता के प्रति जवाबदेही का आईना होता है। नागरिकों को यह जानने का पूरा अधिकार है कि उनके कर का पैसा किस प्रकार और किन प्राथमिकताओं के तहत खर्च किया जा रहा है।

BabuGiri Hindi
Author: BabuGiri Hindi

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