सदन में बोले नायब सिंह सैनी: जनता के पैसे की एक-एक पाई का हिसाब रख रही है सरकार
चंडीगढ़, 24 फरवरी। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने विधानसभा सदन में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक से जुड़े मामले पर विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि राज्य सरकार के विभागों, बोर्डों और निगमों से संबंधित संपूर्ण राशि बैंक द्वारा वापस जमा कर दी गई है। उन्होंने बताया कि आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने कुल 556 करोड़ रुपये संबंधित विभागों के खातों में लौटाए हैं, जिनमें लगभग 22 करोड़ रुपये ब्याज भी शामिल हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने बैंक के उच्चाधिकारियों के सहयोग से 24 घंटे से भी कम समय में पूरी राशि रिकवर कर ली। उन्होंने इसे सरकार की तत्परता और पारदर्शिता की प्रतिबद्धता का उदाहरण बताया।
“डबल इंजन की सरकार रख रही है हर पाई का हिसाब”
सदन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज देश को नरेंद्र मोदी जैसा मजबूत नेतृत्व मिला है, जिनके मार्गदर्शन में डबल इंजन की सरकार जनता के पैसे की एक-एक पाई का हिसाब रख रही है। उन्होंने कहा कि यह हरियाणा के 2 करोड़ 80 लाख लोगों की मेहनत की कमाई है और इसे केवल जनकल्याण के कार्यों पर ही खर्च किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि वित्त सचिव की अध्यक्षता में गठित हाई-लेवल कमेटी इस पूरे प्रकरण में कर्मचारियों और अधिकारियों की जवाबदेही तय करेगी।
“भ्रष्टाचार की फाइलें दबाने का समय खत्म”
नायब सिंह सैनी ने कहा कि हरियाणा में शासन की कार्यप्रणाली अब पूरी तरह बदल चुकी है। भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों को दबाने का दौर समाप्त हो गया है। सरकार ‘जीरो टॉलरेंस टू करप्शन’ की नीति पर काम कर रही है और यह सुनिश्चित कर रही है कि कोई भी सरकारी धन गलत तरीके से खर्च न हो।
उन्होंने बताया कि बैंक के अनुसार यह मामला मुख्य रूप से चंडीगढ़ स्थित शाखा से जुड़ा था, जिसमें मिडिल और लोअर लेवल के कर्मचारियों की मिलीभगत सामने आई है। मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि इस प्रकरण में शामिल कोई भी व्यक्ति—चाहे वह सरकारी अधिकारी हो या बैंक कर्मचारी—बख्शा नहीं जाएगा।
मुख्यमंत्री ने दोहराया कि सरकार पारदर्शिता, जवाबदेही और सुशासन के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है और जनता के हितों की रक्षा सर्वोपरि है।












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