चंडीगढ़/नई दिल्ली। राज्यसभा सांसद Rajinder Gupta ने संसद के उच्च सदन Rajya Sabha में सरकारी अधिकारियों द्वारा निजी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के बढ़ते उपयोग पर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने केंद्र सरकार से इस विषय पर स्पष्ट और व्यापक नीति बनाने की मांग की, ताकि प्रशासनिक कार्यों से जुड़ी संवेदनशील जानकारी के दुरुपयोग और प्रोटोकॉल के उल्लंघन को रोका जा सके।
अधिकारियों के सोशल मीडिया उपयोग पर जताई चिंता
सदन में चर्चा के दौरान सांसद Rajinder Gupta ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में कई वरिष्ठ अधिकारी—जिनमें Indian Administrative Service, Indian Police Service के अधिकारी और न्यायपालिका से जुड़े कुछ पदाधिकारी भी शामिल हैं—अपने आधिकारिक कार्यों से संबंधित जानकारी और गतिविधियों को निजी सोशल मीडिया खातों पर साझा कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि शासन में पारदर्शिता और जनता के साथ संवाद बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके साथ-साथ संस्थागत संचार और व्यक्तिगत प्रचार के बीच स्पष्ट सीमा बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है।
कार्रवाई के वीडियो पोस्ट करने की प्रवृत्ति पर सवाल
सांसद ने कहा कि कई मामलों में अधिकारियों द्वारा छापेमारी, निरीक्षण या अन्य प्रशासनिक कार्रवाई से जुड़े वीडियो निजी सोशल मीडिया खातों पर साझा किए जाते हैं। इन वीडियो को कई बार नाटकीय तरीके से प्रस्तुत किया जाता है, जिनमें विशेष प्रभाव (स्पेशल इफेक्ट्स) और संगीत भी जोड़ा जाता है।
उनके अनुसार ऐसी प्रवृत्ति प्रशासनिक कार्यों की गंभीरता को प्रभावित कर सकती है और इससे यह सवाल भी उठता है कि क्या सरकारी कार्रवाई का प्रचार व्यक्तिगत स्तर पर किया जा रहा है।
आधिकारिक सूचना से पहले सोशल मीडिया पर जानकारी
गुप्ता ने यह भी कहा कि कई बार ऐसा देखने में आया है कि सरकारी कार्रवाई से जुड़ी जानकारी पहले निजी सोशल मीडिया खातों पर सामने आ जाती है, जबकि उसे औपचारिक रूप से सरकारी माध्यमों से बाद में जारी किया जाता है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति प्रोटोकॉल और गोपनीयता को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े करती है, खासकर तब जब मामला न्यायिक प्रक्रिया से जुड़ा हो या अदालत में विचाराधीन हो।
पुराने नियम, नई चुनौती
सांसद ने कहा कि डिजिटल युग में यह प्रवृत्ति स्पष्ट रूप से दिखाती है कि मौजूदा नियामक ढांचे को अद्यतन करने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि All India Services Conduct Rules 1968 और Central Civil Services Conduct Rules 1964 जैसे नियम उस समय बनाए गए थे, जब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म अस्तित्व में नहीं थे।
केंद्र से व्यापक सोशल मीडिया नीति की मांग
इस संदर्भ में Rajinder Gupta ने केंद्र सरकार से सार्वजनिक पदों पर आसीन अधिकारियों के लिए एक व्यापक सोशल मीडिया नीति तैयार करने की मांग की। उन्होंने सुझाव दिया कि इस नीति में निम्न बिंदुओं को स्पष्ट रूप से शामिल किया जाए—
आधिकारिक संचार और निजी सोशल मीडिया के उपयोग के बीच स्पष्ट सीमाएं तय की जाएं।
संवेदनशील और न्यायालय में विचाराधीन मामलों से जुड़ी सूचनाओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
सार्वजनिक पदों पर बैठे अधिकारियों द्वारा डिजिटल प्लेटफॉर्म के उपयोग में जवाबदेही तय की जाए।
सांसद ने कहा कि यदि समय रहते स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं बनाए गए, तो भविष्य में इससे प्रशासनिक व्यवस्था और संस्थागत पारदर्शिता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।











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