June 10, 2026 10:44 am

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हाईवे एनओसी के बदले 10 लाख की रिश्वत मांगने का आरोप, NHAI के परियोजना निदेशक पर CBI केस दर्ज

शिमला, 12 मार्च। हिमाचल प्रदेश में नेशनल हाईवे से जुड़े एक बड़े भ्रष्टाचार मामले ने प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) के एक परियोजना निदेशक और चंडीगढ़ की एक महिला आर्किटेक्ट के खिलाफ 10 लाख रुपये की कथित रिश्वत मांगने के आरोप में मामला दर्ज किया है। आरोप है कि हाईवे से पेट्रोल पंप को जोड़ने के लिए जरूरी एनओसी देने के बदले यह रकम मांगी गई थी।
नूरपुर के पेट्रोल पंप संचालक ने की शिकायत
जांच एजेंसी के अनुसार मामला हिमाचल प्रदेश के नूरपुर क्षेत्र से जुड़ा है। यहां पेट्रोल पंप संचालक ईशान धींगरा ने शिकायत दर्ज कराई कि हाईवे से पंप को जोड़ने की अनुमति देने के बदले उनसे भारी रिश्वत की मांग की जा रही थी।
शिकायत में कहा गया कि निरीक्षण के दौरान एनएचएआई के परियोजना निदेशक विकास सुरजेवाला ने संकेत दिया कि बिना “बड़ी रकम” दिए काम आगे नहीं बढ़ेगा।
पेट्रोल पंप बंद कराने की दी चेतावनी
पीड़ित ने आरोप लगाया कि निरीक्षण के दौरान अधिकारी ने कड़े शब्दों में कहा कि यदि उनकी शर्तें पूरी नहीं की गईं तो पेट्रोल पंप की हाईवे से जुड़ी अनुमति रद्द कर दी जाएगी। इससे पंप का संचालन पूरी तरह बंद हो सकता था और कारोबारी को भारी नुकसान उठाना पड़ता।
शिकायत में यह भी कहा गया कि इसी दौरान उसे चंडीगढ़ की एक आर्किटेक्ट से संपर्क करने के लिए कहा गया, जो कथित तौर पर इस पूरे मामले में बिचौलिये की भूमिका निभा रही थी।
आर्किटेक्ट के जरिए तय हुई कथित डील
जांच में सामने आया है कि चंडीगढ़ की आर्किटेक्ट सीमा राजपाल से पीड़ित की मुलाकात कराई गई। बताया गया कि पालमपुर कार्यालय में हुई इस मुलाकात के दौरान उन्होंने कहा कि अधिकारी से उनकी बात हो चुकी है और काम करवाने के लिए 10 लाख रुपये का इंतजाम करना होगा।
दबाव बनाने के लिए खुदवाई गई जमीन
मामले में यह भी आरोप है कि पेट्रोल पंप संचालक पर दबाव बनाने के लिए पंप के सामने करीब 28 मीटर तक खुदाई कर दी गई, जिससे ईंधन सप्लाई बाधित होने की स्थिति बन गई और कारोबार पर गंभीर असर पड़ा।
पहली किस्त के तौर पर 5 लाख तय
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि रिश्वत की रकम एकमुश्त देने के बजाय किस्तों में लेने की योजना बनाई गई थी। शुरुआती सहमति के अनुसार पहली किस्त के रूप में 5 लाख रुपये देने की बात तय हुई थी।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज
शिकायत मिलने के बाद केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज कर लिया है। अब जांच एजेंसी पूरे मामले की गहराई से पड़ताल कर रही है और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही है।
इस खुलासे के बाद प्रदेश में सरकारी परियोजनाओं से जुड़े अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। यदि आरोप सही साबित होते हैं तो यह मामला हाईवे परियोजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर बड़ी बहस छेड़ सकता है।

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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